Category : संपादकीय
विपक्ष में सेंध, एजेंसियों की छाया और ‘अजेय सत्ता’ की राजनीति — क्या बदल रहा है भारतीय लोकतंत्र?
विशेष रिपोर्ट ✍🏻प्रहरी संवाददाता, मुंबई/ नई दिल्ली | भारतीय राजनीति में अब चुनाव सिर्फ वोटों से नहीं, बल्कि विधायकों, संसाधनों और राजनीतिक दबाव की ताकत...
सरकार के भीतर से अंदरूनी गवाहियां: क्या राजनीतिक जीत के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था हार रही है?
‘मार्कशीट’ चमकीली, पर ‘इकोनॉमी’ फेल: जब अंदरूनी सिपहसालारों ने ही खोल दी सरकारी दावों की पोल ✍️ प्रहरी संवाददाता, मुंबई | किसी भी जीवंत लोकतंत्र...
जाबांज पॉलिटिकल-बिल्डर नेक्सस से गंजी हो चुकी खाड़ी और दादू हाल्या पाटिल का ‘लापता’ पता!
कंक्रीट के उस आलीशान और बेरहम जंगल के नाम… जहां प्रकृति की बलि देकर ‘विकास’ की बहुमंजिला इमारतें खड़ी की जा चुकी हैं। इस गहरी...
वेतन व्यवस्था का सच: सरकारी कर्मचारी vs साहब, न्यूनतम वेतन भी निजी मजदूर से पीछे
भत्तों और सुविधाओं से और बढ़ती असमानता निजी सेक्टर में सरकारी नौकरी भी पीछे! वेतन असमानता पर बड़ा खुलासा ✍️ वरिष्ठ संवाददाता, मुंबई/नई दिल्ली |...
एक्सक्लूसिव: 850 सीटों वाली नई लोकसभा और महिला आरक्षण का मेगा प्लान
संसद में ऐतिहासिक ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पेश 850 होगी लोकसभा सीटों की संख्या महिलाओं को 33% आरक्षण ✍️ प्रहरी संवाददाता मुंबई / नई दिल्ली...
