घरेलू रक्षा उद्योग को मिलेगा 1.74 लाख करोड़ का बूस्ट, जानें किन कंपनियों की खुलेगी किस्मत
✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई/नई दिल्ली | सीमा पर उभरती सामरिक चुनौतियों और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक-ड्रोन युद्ध के दौर में तीनों सेनाओं की मारक क्षमता को अभूतपूर्व स्वदेशी विस्तार मिलने जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने 2.12 लाख करोड़ रुपये के रक्षा खरीद प्रस्तावों को ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (एओएन) दे दी है। इस ऐतिहासिक फैसले की सबसे बड़ी ताकत यह है कि कुल बजट का 82 फीसदी हिस्सा, यानी करीब 1.74 लाख करोड़ रुपये सीधे घरेलू रक्षा उद्योग में निवेश किए जाएंगे। संपूर्ण खरीद ‘बाय इंडियन-आईडीडीएम’ और ‘बाय इंडियन’ श्रेणियों के तहत होगी, जिससे विदेशी हथियारों पर निर्भरता लगभग खत्म करने में मदद मिलेगी।
रक्षा खरीद प्रक्रिया के तहत डीएसी द्वारा दी गई एओएन किसी भी रक्षा सौदे का पहला वैधानिक चरण होता है, जिसके बाद रक्षा मंत्रालय कंपनियों को औपचारिक टेंडर (आरएफपी) जारी कर ट्रायल्स और कमर्शियल नेगोशिएशन की प्रक्रिया शुरू करेगा। इस महा-आवंटन में आधुनिक मानव रहित प्रणालियों, एयर डिफेंस मिसाइलों, लंबी दूरी के तोपखाने, बहुउद्देश्यीय सैन्य हेलीकॉप्टरों और नौसैनिक इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों को शीर्ष प्राथमिकता दी गई है।
इस नीतिगत कदम से सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की अग्रणी रक्षा कंपनियों के लिए भारी कारोबारी अवसर तैयार हुए हैं। थल सेना और वायु सेना के पुराने चेतक-चीता बेड़े को बदलने के लिए करीब 200 लाइट मल्टी-रोल एवं यूटिलिटी हेलीकॉप्टरों के स्वदेशी निर्माण को मंजूरी दी गई है। इसका मुख्य लाभ हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को मिलेगा, जिसके लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्म पर आधारित इस परियोजना की अनुमानित लागत 25,000 से 30,000 करोड़ रुपये है। वहीं, 155 मिमी ट्रैक्ड सेल्फ-प्रोपेल्ड गन सिस्टम (के-9 वज्र-टी) के नए बैच के लिए 7,000 से 9,000 करोड़ रुपये के अनुबंध में लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) और मोबिलिटी पार्टनर के रूप में बीईएमएल सबसे आगे हैं।
आधुनिक युद्धकला के अनुरूप लंबी दूरी के कामिकेज ड्रोन, टोही यूएवी और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों के लिए 12,000 से 15,000 करोड़ रुपये का आवंटन अनुमानित है, जिससे सोलर इंडस्ट्रीज, बीईएल, अडानी डिफेंस, आइडियाफोर्ज और जेन टेक्नोलॉजीज की ऑर्डर बुक को बड़ा सहारा मिलेगा। सीमावर्ती चौकियों की हवाई सुरक्षा के लिए मंजूर 6,000 से 8,000 करोड़ रुपये की ‘वीशोराड्स’ मिसाइल प्रणाली का उत्पादन भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) और रडार-सेंसर आपूर्ति भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) करेगी।
नौसैनिक मोर्चे पर युद्धपोतों की हिफाजत के लिए एक्टिव ऑफबोर्ड डिकॉय सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर उपकरणों का काम एमडीएल, जीआरएसई और एस्ट्रा माइक्रोवेव को गति देगा, जबकि भारी सैन्य ट्रकों के लिए बीईएमएल, टाटा और अशोक लीलैंड दौड़ में हैं। यह विशाल पूंजी निवेश वर्ष 2029-30 तक तीन लाख करोड़ रुपये के घरेलू रक्षा उत्पादन के राष्ट्रीय लक्ष्य को निर्णायक गति देगा।
