✍️ प्रहरी संवाददाता मुंबई | विजयादशमी की शाम देश की आर्थिक राजधानी में शिवसेना की असली विरासत और सत्ता के अधिकार को लेकर छिड़ा सियासी घमासान अपने सबसे आक्रामक और विस्फोटक मुकाम पर पहुंच गया। ऐतिहासिक शिवाजी पार्क के पारंपरिक मंच से शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने डबल इंजन सरकार को ‘खोखे की सरकार’ और ‘जनादेश का डाकू’ करार देते हुए कानून-व्यवस्था और जांच एजेंसियों के मुद्दे पर गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सीधे निशाने पर लिया। साबरमती जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई का नाम उछालते हुए ठाकरे ने सीधा तंज कसा कि गैंगस्टर जेल में बैठकर आराम से ढोकला-फाफड़ा खा रहा है और अगर मुख्यमंत्री फडणवीस में दम है तो अपने ‘बाबा’ के पास जाकर उस बिश्नोई को महाराष्ट्र लेकर आएं, दूसरों पर ‘शहरी नक्सली’ का ठप्पा लगाने वालों की जुबान इस पर क्यों बंद हो जाती है।
वहीं गोरेगांव के नेस्को (NESCO) सेंटर में आयोजित शिवसेना की डायमंड जुबली दशहरा रैली के मंच से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने जोरदार पलटवार करते हुए उद्धव ठाकरे को ‘वोट चोर’ करार दिया और कहा कि 2019 में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को मिले स्पष्ट जनादेश की चोरी कर कांग्रेस की गोद में महाविकास आघाड़ी सरकार बनाना ही महाराष्ट्र के इतिहास की सबसे बड़ी वोट डकैती थी।
शिवाजी पार्क में उमड़े भारी जनसैलाब के सामने गरजते हुए उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि दिल्ली के इशारे पर धनुष-बाण का चिह्न और पार्टी का आधिकारिक नाम तो चुराया जा सकता है, लेकिन बालासाहेब ठाकरे का विचार और महाराष्ट्र की जनता के दिलों में धड़कने वाली असली शिवसेना कोई नहीं छीन सकता।
ठाकरे ने आरोप लगाया कि राज्य के स्वाभिमान, प्रमुख उद्योगों और युवाओं के रोजगार को सुनियोजित ढंग से लूटकर गुजरात और अन्य राज्यों में भेजा जा रहा है। उन्होंने मंच से कार्यकर्ताओं को आर-पार की जंग का संकल्प दिलाते हुए कहा कि यह लड़ाई सिर्फ सत्ता की नहीं बल्कि महाराष्ट्र के अस्तित्व और अस्मिता को बचाने का निर्णायक धर्मयुद्ध है, जिसमें राज्य की स्वाभिमानी जनता आगामी चुनावों में पीठ में छुरा घोंपने वाले गद्दारों को हमेशा के लिए दफन कर देगी।
दूसरी तरफ, गोरेगांव के नेस्को ग्राउंड से शक्ति प्रदर्शन करते हुए एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर बालासाहेब के कट्टर हिंदुत्व का सौदा कुर्सी के लिए करने का सीधा आरोप जड़ा। शिंदे ने दो-टूक कहा कि 2022 में उठाया गया उनका ऐतिहासिक कदम कोई बगावत नहीं बल्कि बालासाहेब के विचारों और शिवसैनिकों के आत्मसम्मान को बचाने वाली एक वैचारिक क्रांति थी, जिसने पार्टी को कांग्रेस के आगे घुटने टेकने और कार्यकर्ताओं को उपेक्षा व जेल जाने से बचाया।
उपमुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियों, विशेष रूप से ‘लाडली बहना’ योजना और किसान हितैषी फैसलों का हवाला देते हुए दावा किया कि जमीन पर उतरकर आम जनता की सेवा करने वाली ही असली शिवसेना है। मुंबई के दोनों सिरों- दादर और गोरेगांव – पर एक साथ गूंजे इन दोनों तीखे भाषणों और लाखों शिवसैनिकों के शक्ति प्रदर्शन ने अभूतपूर्व सुरक्षा बंदोबस्त के बीच महाराष्ट्र की राजनीतिक जंग का पारा चरम पर पहुंचा दिया है।
