टाइगर श्रॉफ की कार पर 7 राउंड ताबड़तोड़ फायरिंग
✍️ प्रहरी संवाददाता मुंबई | महाराष्ट्र में संगठित अपराध और जबरन वसूली (extortion) के नेटवर्क ने राज्य की कानून-व्यवस्था को पूरी तरह हिला कर रख दिया है। लॉरेंस बिश्नोई गैंग और स्थानीय आपराधिक गुटों के बढ़ते दुस्साहस ने गृह मंत्रालय संभाल रहे देवेंद्र फडणवीस की कार्यप्रणाली और भाजपा नीत सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। 90 के दशक के अंडरवर्ल्ड दौर की वापसी की तरह अब फिल्म निर्माता, अभिनेता, नेता और बिल्डर खुलेआम सिंडिकेट्स के निशाने पर हैं।
हालिया घटनाक्रम ने गृह विभाग की विफलता को और उजागर किया है। जुहू में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर 7 राउंड ताबड़तोड़ फायरिंग की गई, जिसमें दो लोग घायल हुए। इससे पहले इसी वर्ष फरवरी में फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के जुहू स्थित आवास पर भी गोलियां बरसाई गई थीं। यह सिलसिला 2024 में सलमान खान के आवास पर गोलीबारी और पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की निर्मम हत्या के बाद से लगातार बेकाबू बना हुआ है।
आंकड़े और जमीनी हालात बताते हैं कि गृह विभाग की सख्त बयानों और MCOCA की कार्यवाहियों के बावजूद अपराधियों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। मुंबई, पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ बेल्ट में बिल्डरों, स्टील-फर्नीचर व्यापारियों और ज्वैलर्स से विदेशी नंबरों और वीपीएन कॉल्स के जरिए करोड़ों की रंगदारी मांगी जा रही है। इनकार करने पर उत्तर भारत से भाड़े के शूटर बुलाकर दिनदहाड़े फायरिंग कराई जा रही है। पिंपरी-चिंचवड़ में 2025 में 30 से अधिक गिरोहों पर MCOCA लगाने और नागपुर में दर्जनों मामलों के बावजूद संगठित नेटवर्क का खौफ कम नहीं हो रहा है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और पुलिस विभाग के आंकड़े भी राज्य की बदहाल स्थिति की पुष्टि करते हैं। 2024 में राज्य में हिंसक अपराधों का आंकड़ा तेजी से बढ़कर 87,791 तक पहुंच गया। बच्चों के खिलाफ अपराध (24,171) और बच्चों के अपहरण (12,994) के मामलों में महाराष्ट्र देश में शीर्ष पर दर्ज हुआ, जबकि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में राज्य दूसरे स्थान पर रहा।
विपक्ष का आरोप है कि गृह विभाग अपराधियों पर नकेल कसने के बजाय महज कागजी कार्रवाई और राजनीतिक प्रबंधन में जुटा है। नागपुर जैसे शहर में हत्या की दर चिंताजनक रूप से उच्च बनी हुई है, जबकि मुंबई में 2025 के दौरान कुल आपराधिक मामलों का 64,000 पार कर जाना पुलिसिंग की नाकामी दर्शाता है। सवाल यह उठ रहा है कि जब राजधानी में वीवीआईपी और व्यापारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा? लगातार हो रही वारदातों ने राज्य सरकार के ‘सुरक्षित महाराष्ट्र’ के दावों की पोल खोल दी है।
प्रमुख शहरों के आपराधिक आंकड़े
मुंबई :
2025: कुल 64,012 मामले (2024 के 52,718 से वृद्धि), डिटेक्शन रेट 74% से 81%।
हत्या: 2025 में 126 (123 डिटेक्टेड), 2024 में 107।
अपहरण: 2025 में कुल लगभग 1,423 (पूर्वी उपनगरों में वृद्धि देखी गई)।
अन्य: डकैती/लूट में कमी, महिलाओं/बच्चों के खिलाफ अपराध में वृद्धि।
पुणे:
हत्या: 2025 में 79 (2024: 93, 2023: 101 — कमी)।
हत्या का प्रयास: 2025 में 179 (2024: 240)।
कुल अपराध में गंभीर हिंसक अपराधों में सुधार, लेकिन “हर्ट” (चोट) मामले उच्च।
नागपुर:
हत्या: 2024 में 88 (दर 3.5 प्रति लाख – मेट्रो शहरों में दूसरे स्थान पर, पटना के बाद)। 2025 में लगभग 91।
कुल अपराध 2024 में 21,898 (2023 से कमी)। trivial विवाद और व्यक्तिगत झगड़े मुख्य कारण।
नवी मुंबई:
2025: कुल 7,835 मामले (2024 के 7,369 से वृद्धि), डिटेक्शन 80%। संपत्ति/आर्थिक अपराध बढ़े, महिलाओं के खिलाफ 99% डिटेक्शन।
ठाणे:
2025 में ज़ोन-वार कुल लगभग 11,965+ मामले (विभिन्न ज़ोनों में)। विस्तृत हत्या/अपहरण के अलग आंकड़े सार्वजनिक रूप से सीमित।
