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‘असिस्टेंट’ से ‘ऑपरेटर’ बना एआई: साइबर जासूसी के बाद जैविक हथियार अनुसंधान तक पहुंचा दुरुपयोग; एंथ्रोपिक का बड़ा खुलासा

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फर्जी न्यूजरूम, डेटिंग फ्रॉड, जैविक, आईटी और वैश्विक सुरक्षा तंत्र में एआई की खतरनाक सेंधमारी

✍️डिजिटल डेस्क, सैन फ्रांसिस्को | कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का बेलगाम विस्तार अब साधारण डिजिटल धोखाधड़ी की हदें पार कर जैविक शोध, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अवसंरचना और वैश्विक जनसांख्यिकीय सुरक्षा के लिए सीधा सामरिक संकट बन चुका है। प्रमुख एआई सुरक्षा शोध संस्थान एंथ्रोपिक द्वारा जारी नवीनतम ‘थ्रेट इंटेलिजेंस रिपोर्ट’ के अनुसार, एआई प्रणाली अब सिर्फ निर्देशों का पालन करने वाले ‘असिस्टेंट’ तक सीमित नहीं है, बल्कि जटिल दुर्भावनापूर्ण अभियानों को खुद नियंत्रित करने वाला ‘ऑर्केस्ट्रेटर’ बन चुकी है। दिसंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच दर्ज मामलों के आधार पर कंपनी ने आगाह किया है कि हैकर्स और साइबर सिंडिकेट्स ने क्लाउड (Haiku, Sonnet और Opus) मॉडल्स की क्षमताओं का लाभ उठाकर छह महाद्वीपों में सूचना तंत्र, आईटी सुरक्षा और संवेदनशील हथियारों से जुड़े अनुसंधानों में गहरी पैठ बनाई।

रिपोर्ट में सबसे गंभीर खतरा जैविक सुरक्षा के मोर्चे पर सामने आया है, जहां अनुसंधान के दोहरे उपयोग (ड्यूल-यूज) की आड़ में अत्यधिक घातक तकनीकी मदद हासिल करने की कोशिश की गई। एंथ्रोपिक ने पैथोजेन, टॉक्सिन और खतरनाक जैविक क्षमताओं से संबंधित पांच ऐसे संवेदनशील अध्ययनों की पहचान की, जिनमें एआई को जैव-हथियारों के विकास में सहायक बनाने के प्रयास किए जा रहे थे।

दूसरी ओर, राष्ट्रीय आईटी और डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए एआई मैलवेयर विनाशकारी साबित हो रहे हैं। रूसी जासूसी अभियानों में यह तथ्य सामने आया कि एआई ने न केवल टोही और डेटा विश्लेषण किया, बल्कि सुरक्षा प्रणालियों (EDR टूल्स) द्वारा पकड़े जाने पर खुद मैलवेयर के कोड को संशोधित कर दोबारा रीबिल्ड कर दिया, ताकि वह किसी भी पारंपरिक फायरवॉल की पकड़ में न आए।

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्वायत्त एल्गोरिदम अंतरिक्ष मिशनों के उपग्रह संचार, ग्राउंड कंट्रोल और नेविगेशन नेटवर्क को लक्षित करते हैं, तो डेटा मैनिपुलेशन और कमांड हाईजैकिंग से पूरी अंतरिक्ष निगरानी व्यवस्था ठप हो सकती है।

जनसांख्यिकीय और सामाजिक सुरक्षा के स्तर पर भी एआई ने जनमत को गुमराह करने और संगठित अपराध के अर्थशास्त्र को पूरी तरह बदल दिया है। फ्रांस स्थित डिजिटल विज्ञापन एजेंसी ‘एलकेएम कंपनी’ ने 70 फर्जी समाचार पोर्टल और सैकड़ों छद्म सोशल मीडिया हैंडल्स का ढांचा खड़ा किया, जिसके जरिए क्लाउड मॉडल ने जेसन और एचटीएमएल कोडिंग में सीधे 20 भाषाओं में 8,913 से ज्यादा फर्जी लेख प्रकाशित कर वैश्विक विमर्श को प्रभावित किया।

इसी क्रम में चीन आधारित एक सिंडिकेट ने 20 से अधिक डेटिंग ऐप्स के माध्यम से 4,700 से ज्यादा एआई प्रोफाइलों को तैनात कर महज दो हफ्तों में 25 हजार से ज्यादा लोगों से 23.6 लाख संवाद कराए, जहां 75 फीसदी बातचीत पूरी तरह बॉट्स संचालित कर रहे थे। वहीं सीरिया में उइगर समुदाय को लक्षित करने के लिए स्थानीय बोलियों में अनुवाद और भर्ती प्रक्रिया में भी एआई का रणनीतिक इस्तेमाल हुआ, जिसने स्पष्ट कर दिया है कि एआई जनसांख्यिकीय विभाजन को गहरा करने का सबसे सस्ता और प्रभावी हथियार बन चुका है।

 


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