एमएलसी चुनाव: मोदी-योगी और फडणवीस के अभेद्य किलों में सेंध, सोशल मीडिया पर उड़ रही खिल्ली
✍️ प्रहरी संवाददाता, मुंबई | चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों के नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी की चुनावी जीत के दावों की हवा निकाल दी है। कागजों पर एनडीए को 16 सीटें थमाकर भले ही पार्टी जश्न के पटाखे फोड़ रही हो, लेकिन असलियत यह है कि इस चुनावी महासमर में सेनापतियों के अपने ही तंबू उखड़ गए। जिन सीटों को बीजेपी अपनी जागीर और अजेय दुर्ग मानकर इतरा रही थी, वहां तमाम तरह के हथकंडों को अपनाने के बावजूद हार नसीब हुई। फिर चाहे वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी हो, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गृहक्षेत्र और आरएसएस का मुख्यालय नागपुर हो, या फिर पार्टी का पारंपरिक गढ़ पुणे, हर जगह शिक्षित मतदाताओं ने सत्ता के अहंकार पर करारी झाड़ू फेर दी है।
इस सियासी तमाशे का सबसे शर्मनाक पहलू सोशल मीडिया पर देखने को मिला। बुधवार शाम जब बैलेट पेपरों की गिनती जारी थी, तब अति-उत्साह में डूबे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाम सवा पांच बजे विपक्ष का उपहास उड़ाते हुए सवाल दागा कि जरा बताओ कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं। इस तंज को लपकते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित बीजेपी का पूरा तंत्र कांग्रेस को चिढ़ाने में जुट गया। लेकिन, सियासत का दांव ऐसा उल्टा पड़ा कि चंद ही घंटों में नागपुर स्नातक सीट से नतीजों का जो चाबुक चला, उसने सत्ता के गलियारों में सन्नाटा खींच दिया।
कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने बीजेपी के सुधाकर कोहले को धूल चटा दी। नागपुर जो आरएसएस का वैचारिक दिल और फडणवीस का राजनीतिक पालना है, वहां इस ऐतिहासिक थप्पड़ की गूंज इतनी तेज थी कि मुख्यमंत्री फडणवीस को अपना ही वह तंजिया पोस्ट चुपचाप डिलीट करके मुंह छिपाना पड़ा।
दुर्ग ढहने का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। जिसे काशी का ‘विश्व स्तरीय मॉडल’ बताकर प्रचारित किया जाता है, उसी वाराणसी शिक्षक सीट पर समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने बीजेपी के प्रमोद मिश्रा को पटकनी देकर साफ कर दिया कि प्रधानमंत्री के अपने घर में ही जनता का भरोसा डगमगा चुका है। वहां के शिक्षकों ने देश के प्रधानमंत्री के घर में ही बीजेपी को आइना दिखा दिया।
उधर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सबसे मजबूत दुर्ग गोरखपुर में भी बीजेपी बमुश्किल कुछ ही वोटों के फासले से अपनी इज्जत बचा पाई, जबकि पुणे स्नातक सीट जैसी बीजेपी की पारंपरिक ‘जमीन’ भी उनके हाथ से फिसल गई।
अब स्थिति यह है कि जो बीजेपी कल तक विरोधियों को जीरो पर आउट बताकर हंस रही थी, वह खुद मीम्स और तंज के दलदल में फंस चुकी है। इस करारी और रणनीतिक शिकस्त के बाद विपक्ष ने बीजेपी को उसी की भाषा में धोना शुरू कर दिया है।
कांग्रेस सांसद प्रणीति शिंदे ने सीधे निशाने साधते हुए सोशल मीडिया पर ललकारा कि काशी में नरेंद्र हारे, गोरखपुर में आदित्यनाथ डगमगाए और नागपुर में देवेंद्र का किला ढह गया। पतन की शुरुआत हो चुकी है। एनडीए भले ही आंकड़ों की बाजीगरी दिखाकर इस चुनावी नतीजे को अपनी जीत करार देने की लाख कोशिश कर ले, लेकिन मोदी, फडणवीस और योगी के गृहक्षेत्रों में लगी यह राजनीतिक सेंध बीजेपी के माथे पर ऐसा दाग छोड़ गई है, जिसे वोटों के किसी भी जोड़-घटाव से धोया नहीं जा सकता
