Category : संपादकीय
संवैधानिक जनतंत्र पर फासीवाद के खतरे को लेकर कोई विचारोत्तेजक बहस क्यों नहीं है?
“स्वाधीनता पूर्व के वर्षों में वर्ण और वर्ग से मुक्त लेखन की प्रेमचंद की जिस परम्परा का सूत्रपात हुआ था, पिछले कुछ दशकों के हिंदी...
‘प्रेमचंद की परंपरा’ पर फातिहा न पढ़ें’
आज (31 जुलाई) प्रेमचंद जयंती है. स्मरण संवाद. वीरेंद्र यादव जब जब प्रेमचंद की चर्चा शुरू होती है तब तब प्रेमचंद को उनके वैचारिक व...
जांच एजेंसियों का डर या सरकार पर भरोसा नहीं रहा
प्रहरी संवाददाता, मुंबई। पिछले पांच साल की तुलना में वर्ष 2021 में भारत की नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। पिछले...
उत्तम परदेस के लौंडे और फ्री का डाटा…नौकरी, मंहगाई गई भाड़ में…
उत्तम परदेस में बेरोजगारी 2 परसेंट से भी कम है… सूबे के लोग जनमे से तुर्रमखां होते हैं… गांव में छोटा मोटा काम नहीं करेंगे…...
महिला रोजगार में 34 पर्सेंट की गिरावट
कोरोना काल के दौरान वुमन वर्कफोर्स में भारी कमी समाचार प्रहरी, मुंबई। केंद्र सरकार भले ही 5 ट्रिलियन इकोनॉमी होने का दावा करते नहीं अघाती,...
