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पांच राज्यों में चुनावी शंखनाद: 4 मई को आएंगे नतीजे, बंगाल में दो चरणों में मतदान

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  • आचार संहिता: चुनावी राज्यों में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू।

  • तकनीक का उपयोग: पीठासीन अधिकारी हर 2 घंटे में वोटिंग प्रतिशत अपडेट करेंगे।

  • सुरक्षा: हिंसा मुक्त चुनाव के लिए 25 लाख अधिकारियों की तैनाती।

✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, नई दिल्ली | भारत निर्वाचन आयोग ने रविवार को देश के चार प्रमुख राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में चुनावी प्रक्रिया अप्रैल माह में संपन्न होगी, जबकि सभी क्षेत्रों के भाग्य का फैसला 4 मई को मतगणना के साथ होगा। चुनाव तिथियों की घोषणा के साथ ही इन सभी राज्यों में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, पश्चिम बंगाल की 294 सीटों के लिए इस बार केवल दो चरणों में मतदान कराया जाएगा। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को 152 सीटों पर और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को शेष 142 सीटों पर होगा। तमिलनाडु की सभी 234 सीटों के लिए एक ही चरण में 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। वहीं, केरल (140 सीट), असम (126 सीट) और पुडुचेरी (33 सीट) में 9 अप्रैल को एक साथ मतदान संपन्न होगा। इस बार कुल 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जो दुनिया के कई विकसित देशों की संयुक्त जनसंख्या के बराबर है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया कि आयोग हिंसा मुक्त और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि लगभग 2.19 लाख मतदान केंद्रों पर 25 लाख चुनाव अधिकारी तैनात रहेंगे। तकनीक का लाभ उठाते हुए पीठासीन अधिकारी हर दो घंटे में मतदान प्रतिशत अपडेट करेंगे। आयोग ने इस बार मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की संख्या सीमित रखी है ताकि प्रक्रिया सुचारू रहे। एक महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि 20 देशों के प्रतिनिधि भारत के इस ‘लोकतंत्र के उत्सव’ को देखने आएंगे।

इस चुनाव कार्यक्रम में कुछ रोचक बदलाव भी देखे गए हैं। 2021 के मुकाबले इस बार चरणों की संख्या कम की गई है और मतदान अवधि को संक्षिप्त रखा गया है। हालांकि, अंतिम चरण के मतदान और मतगणना के बीच पांच दिनों का अंतराल रखा गया है। विपक्ष ने इस समय सारणी पर सवाल उठाए हैं, लेकिन आयोग ने इसे चुनावी प्रबंधन को सरल बनाने की दिशा में एक कदम बताया है। बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले की गई घोषणाओं पर आयुक्त ने कहा कि अब किसी भी नई लोकलुभावन घोषणा की अनुमति नहीं होगी। इन चुनावों के परिणाम न केवल क्षेत्रीय बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय करेंगे।


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