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मुनाफावसूली की आंधी में उड़ी सोने की चमक; ग्लोबल मार्केट से $2 बिलियन साफ, भारत में 12 महीने बाद ‘रिवर्स गियर’

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✍️ प्रहरी संवाददाता, मुंबई | वैश्विक कमोडिटी बाजार में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोने की चमक पर भारी मुनाफावसूली का साया मंडरा गया है। पिछले एक साल से जारी ताबड़तोड़ खरीदारी के बाद अब निवेशकों ने आक्रामक रूप से अपने कदम पीछे खींचने शुरू कर दिए हैं। मई 2026 के ताजा आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ भारतीय सर्राफा बाजार में भी गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेेटेड फंड्स (Gold ETFs) से निवेशकों ने अरबों डॉलर का फंड बाहर निकाल लिया है। ग्लोबल एसेट्स में $2 बिलियन की सेंध लगी है।

मई महीने में वैश्विक स्तर पर गोल्ड-बैक्ड ETFs से लगभग $2 बिलियन की भारी-भरकम शुद्ध निकासी दर्ज की गई है। इस बिकवाली के चलते ग्लोबल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में महीने-दर-महीने 2 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह सिमटकर $604 बिलियन रह गया है। वहीं कुल वैश्विक होल्डिंग भी 0.4 प्रतिशत घटकर 4,121 टन पर आ गई है, जो फरवरी 2026 में बने 4,176 टन के सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर से महज कुछ ही कदम नीचे है।

इस वैश्विक बवंडर का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। भारत में पूरे एक साल के लंबे अंतराल के बाद पहली बार किसी महीने में नेट आउटफ्लो (निकासी) दर्ज किया गया है। भारतीय निवेशकों ने मई में गोल्ड ETFs से $61 मिलियन (करीब 0.4 टन सोना) की शुद्ध निकासी की है, जिसके बाद देश की कुल होल्डिंग घटकर 116.3 टन रह गई। हालांकि, लॉन्ग-टर्म सेंटिमेंट अब भी मजबूत है क्योंकि पिछले एक साल में भारतीय गोल्ड ETFs ने $3.48 बिलियन का बंपर नेट इनफ्लो हासिल किया है।

फंड मैनेजर्स का मानना है कि पिछले 12 महीनों में गोल्ड फंड्स द्वारा दिए गए 57 प्रतिशत से ज्यादा के रिटर्न के बाद ऊंचे स्तरों पर मुनाफा लॉक करना स्वाभाविक था। इसके अलावा, पिछले तीन महीनों में सोने की कीमतों में आया करीब 3.1 प्रतिशत का करेक्शन भी शॉर्ट-टर्म निवेशकों पर भारी पड़ा।

इस दबाव को मजबूत अमेरिकी रोजगार आंकड़ों और फेड द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च रखने की आशंकाओं से हवा मिली, जिससे डॉलर मजबूत हुआ। 5 जून को समाप्त सप्ताह में ग्लोबल गोल्ड ETFs में शुद्ध निवेश 17 प्रतिशत गिरकर $15.28 बिलियन पर आ गया था।

मई के दौरान सबसे बड़ी निकासी अमेरिका ($1.27 बिलियन), चीन ($513 मिलियन) और कनाडा ($102 मिलियन) से हुई। इसके विपरीत, जापान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों में रुझान मजबूत रहा, जिन्होंने साल की शुरुआत से $3 बिलियन से अधिक का निवेश आकर्षित किया है।

इस बीच, देश में सोने के बढ़ते आयात और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे दबाव को देखते हुए एचडीएफसी, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, टाटा और निप्पॉन इंडिया जैसे दिग्गज म्यूचुअल फंड हाउसेस ने सख्त कदम उठाया है। इन फंड हाउसेस ने गोल्ड ETFs में बड़े सब्सक्रिप्शन पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिए हैं ताकि संस्थागत इनफ्लो को मॉडरेट किया जा सके, क्योंकि नियमों के मुताबिक गोल्ड ETFs को अपने एसेट्स का कम से कम 95 प्रतिशत हिस्सा वास्तविक सोने (Physical Bullion) में ही निवेश करना अनिवार्य होता है।

 


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