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₹620 करोड़ का चंदा, एक उम्मीदवार और बंद दफ्तर: ‘आम जनमत पार्टी’ के करोड़ों के खेल में जांच एजेंसियों का शिकंजा

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  • कांग्रेस से दोगुना फंड जुटाने वाली गुजरात की गुमनाम पार्टी पर आयकर विभाग का शिकंजा

  • बिहार भाजपा उपाध्यक्ष रही थीं संस्थापक, अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष के हस्ताक्षरों की फॉरेंसिक जांच तेज

✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई/ नई दिल्ली/अहमदाबाद | चुनावी राजनीति में नाममात्र की मौजूदगी और खातों में सैकड़ों करोड़ का वारा-न्यारा करने वाली गुजरात की गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी ‘आम जनमत पार्टी’ केंद्रीय जांच एजेंसियों के सीधे रडार पर आ गई है। भारत निर्वाचन आयोग को सौंपे गए वित्तीय दस्तावेजों और मीडिया की खोजी पड़ताल से यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि महज एक लोकसभा उम्मीदवार उतारने वाली इस अनजान पार्टी ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में 620 करोड़ रुपये से अधिक का चंदा जुटाया। यह आंकड़ा देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को मिले कुल राष्ट्रीय चंदे से भी दोगुने से ज्यादा है। वर्ष 2020 में बिहार के पटना से शुरू हुई और महज 20 हजार रुपये के चंदे पर सिमटी यह पार्टी जैसे ही गुजरात के अहमदाबाद स्थानांतरित हुई, इसकी तिजोरी में पैसों की अभूतपूर्व बाढ़ आ गई।

इस पूरे वित्तीय साम्राज्य की कमान कागजों पर राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव मिश्रा और कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र वैष्णव के हाथों में है, जिनके हस्ताक्षर से बैंक खातों के संचालन और निकासी का मैंडेट तय था। हालांकि, जमीन पर पड़ताल करने पर पार्टी के दावे पूरी तरह भरभरा कर गिर गए। अहमदाबाद के जिन पतों पर पार्टी के पंजीकृत कार्यालय दिखाए गए, वे या तो बंद मिले या फिर बेहद सामान्य रिहायशी फ्लैट्स निकले।

चौंकाने वाली बात यह भी है कि कोषाध्यक्ष ने खुद को केवल कागजी पद पर बताते हुए खातों में घूम रही सैकड़ों करोड़ की धनराशि से पूरी तरह अनभिज्ञता जाहिर कर दी है। इसके अलावा पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष अमित व्यास, महासचिव विजयसिंह परमार और लेबर विंग के अध्यक्ष कुंवर सिंह कुशवाहा के नाम शामिल हैं, लेकिन किसी के पास पार्टी की सक्रिय राजनीतिक गतिविधियों का कोई ठोस ब्योरा नहीं है।

मामले ने उस वक्त बड़ा राजनीतिक तूल पकड़ लिया जब पार्टी के संस्थापक सूत्रों की कड़ियां सीधे सत्ताधारी दल से जुड़ती नजर आईं। दरअसल, 2020 में पटना में इस पार्टी की नींव रखने वाली संस्थापक अध्यक्ष अनामिका पासवान वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी, बिहार की प्रदेश उपाध्यक्ष हैं।

हालांकि, उन्होंने इस विवाद से पल्ला झाड़ते हुए स्पष्ट किया है कि वे वर्ष 2022 में ही पार्टी और पद से पूरी तरह इस्तीफा देकर अलग हो चुकी थीं और उसके बाद पार्टी का नियंत्रण गुजरात चला गया था। वर्तमान अध्यक्ष गौरव मिश्रा समेत कार्यकारिणी के अन्य पदाधिकारियों का किसी दल से औपचारिक सदस्यता का रिकॉर्ड सामने नहीं आया है, लेकिन गुजरात के छह दलों द्वारा मिलकर 1500 करोड़ से अधिक का फंड जुटाने की टाइमिंग ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आयकर विभाग और वित्तीय जांच एजेंसियों की शुरुआती जांच में यह आशंका पुख्ता हो रही है कि यह पूरा मामला किसी राजनीतिक दल के विस्तार का नहीं, बल्कि चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कॉरपोरेट्स और हवाला नेटवर्क द्वारा आयकर अधिनियम की धारा 80GGC के तहत 100 प्रतिशत टैक्स छूट हासिल करने का एक संगठित सिंडिकेट था। कागजों पर बड़ी रकम चंदे के रूप में दिखाकर तीन से पांच प्रतिशत का कमीशन काटा जाता था और बाकी रकम नकद लौटा दी जाती थी। अब जांच एजेंसियां पार्टी के खातों के डिजिटल सिग्नेचर, चेकबुक निकासी पर हुए हस्ताक्षरों की फॉरेंसिक जांच और इसमें शामिल वित्तीय ऑपरेटरों की गर्दन नापने की तैयारी में जुट गई हैं।


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