BMC चुनाव से पहले भाजपा की नई रणनीति या उद्धव-राज समीकरण को तोड़ने की चाल?
✍🏻 प्रहरी संवाददाता, मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर गरमाहट आ गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे की हालिया मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को हवा दे दी है। यह मुलाकात ऐसे वक्त हुई है जब राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के बीच सुलह की अटकलें तेज हो चुकी हैं।
सूत्रों के मुताबिक, मुंबई के एक आलीशान होटल में यह मुलाकात करीब दो घंटे चली। इसमें भाजपा नेता मोहित कंबोज और एमएनएस के वरिष्ठ नेता बाला नांदगांवकर, नितिन सरदेसाई और संदीप देशपांडे भी शामिल थे। इस बैठक को लेकर फडणवीस ने बयान दिया है कि यह एक पारिवारिक और गैर-राजनीतिक भेंट थी। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इसे आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें मराठी वोट बैंक की भूमिका अहम मानी जा रही है।
दरअसल, लोकसभा चुनाव से ठीक पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राज ठाकरे से लगभग आठ घंटे तक कड़ी पूछताछ की थी। इसके बाद से उनके सुर भाजपा के प्रति नरम पड़ते देखे गए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दबाव राजनीति में समझौतों और समीकरणों को प्रभावित करने का एक अहम जरिया बन गया है। फडणवीस की यह मुलाकात भी इसी पृष्ठभूमि में देखी जा रही है।
एक ओर जहां उद्धव और राज के बीच सुलह की संभावनाएं उभर रही थीं, वहीं दूसरी ओर फडणवीस की यह पहल इस सुलह को रोकने या अपने पक्ष में मोड़ने की रणनीति के रूप में देखी जा रही है। मराठी वोट बैंक पर पकड़ रखने वाले दोनों नेताओं का एकजुट होना भाजपा और शिंदे गुट के लिए खतरे की घंटी हो सकता है, खासकर आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों के मद्देनज़र।
सूत्रों का दावा है कि फडणवीस ने इस बैठक में राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे को विधान परिषद में नामित करने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा एमएनएस को बीएमसी चुनाव में सीटों की साझेदारी की पेशकश भी चर्चा में है।
हालांकि उद्धव ठाकरे ने सुलह को सैद्धांतिक सहमति दी है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह गठजोड़ महाराष्ट्र के हित में होना चाहिए, भाजपा की राजनीतिक सुविधा के लिए नहीं। ऐसे में अब यह देखना अहम होगा कि राज ठाकरे किस राह पर आगे बढ़ते हैं, उद्धव के साथ मराठी अस्मिता के रास्ते या भाजपा के साथ सत्ता के समीकरणों की दिशा में।
भाजपा के अंदरूनी हलकों से संकेत
नाम न छापने की शर्त पर एक भाजपा पदाधिकारी ने कहा, “अगर मराठी वोट बैंक में विभाजन को रोकना है तो राजनीतिक तौर पर नए विकल्प तलाशे जा रहे हैं। मनसे के साथ तालमेल पर पार्टी गंभीरता से विचार कर रही है।”
