UNICEF और NCRB के आंकड़ों में खुलासा: चाय की दुकान से फैक्ट्री तक मासूमों से हो रहा खतरनाक काम
✍🏻 प्रहरी संवाददाता, मुंबई| भारत में बाल मजदूरी पर रोक के तमाम कानूनों और अभियानों के बावजूद सच्चाई डराने वाली है। यूनिसेफ और एनसीआरबी (एनसीआरबी) की रिपोर्ट्स के मुताबिक देश में आज भी एक करोड़ से ज्यादा बच्चे बाल मजदूरी से जुड़े हुए हैं। कोई चाय की दुकानों पर जूठे बर्तन धो रहा है, तो कोई फैक्ट्रियों में खतरनाक मशीनों के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहा है।
🔹 हर 10 में से 1 बच्चा मजदूर
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में करीब 16 करोड़ बच्चे बाल मजदूरी कर रहे हैं, यानी हर 10 में से 1 बच्चा। इनमें लाखों बच्चे भारत से हैं, जहां गरीबी, शिक्षा की कमी और सामाजिक असमानता इसके मुख्य कारण माने जाते हैं। संगठन के अनुसार, भारत में 7–17 वर्ष की उम्र के लगभग 12.9 मिलियन बच्चे बाल मजदूरी करते हैं।
🔹 80% बाल मजदूरी ग्रामीण भारत में
आंकड़े बताते हैं कि भारत में करीब 80 प्रतिशत बाल मजदूरी ग्रामीण क्षेत्रों में होती है। खेती, घरेलू काम, पशुपालन, ईंट भट्ठे, ढाबे और कुटीर उद्योगों में बड़ी संख्या में बच्चे काम करने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
🔹 यूपी, बिहार और राजस्थान में सबसे ज्यादा बाल मजदूर
देश के पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में देश के कुल बाल मजदूरों का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है। अकेले उत्तर प्रदेश में 21.80 लाख, बिहार में 10.90 लाख, और राजस्थान में 8.50 लाख बच्चों के बाल मजदूरी में शामिल होने के अनुमान हैं। महाराष्ट्र में भी लगभग तकरीबन 7 से 8 लाख बाल मजदूर होने का अनुमान है।
🔹 कानून क्या कहता है?
भारत में बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम 1986, किशोर न्याय अधिनियम 2000 और IPC की विभिन्न धाराओं के तहत बाल मजदूरी अपराध है। 14 साल से कम उम्र के बच्चे को काम पर लगाना प्रतिबंधित है। ऐसा करने पर 1 से 6 महीने की जेल, या 20,000 से 50,000 रुपये तक जुर्माना, या दोनों सजा हो सकती है। खतरनाक व्यवसायों में बच्चों को लगाना और भी बड़ा अपराध माना जाता है।
मुख्य आंकड़े एक नजर में:
भारत में बाल मजदूर: 1 करोड़+
ग्रामीण भारत में: 80% से अधिक
यूपी में: 21.80 लाख
बिहार में: 10.90 लाख
राजस्थान में: 8.50 लाख
सजा: 6 महीने तक जेल या ₹50,000 तक जुर्माना
