✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, तेहरान/वॉशिंगटन डीसी | पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिका ने औपचारिक रूप से स्वीकार किया है कि ईरान के जवाबी हमलों में उसके करीब 100 सैनिक घायल हुए हैं।
पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने यह जानकारी देते हुए बताया कि ये सैनिक 7 जुलाई के बाद हुए विभिन्न हमलों में घायल हुए थे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इनमें से 96 फीसदी सैनिक ठीक होकर अपनी ड्यूटी पर लौट चुके हैं और अधिकांश को सिर में हल्की चोटें (कनकशन) आई थीं। पेंटागन ने यह बयान ‘न्यू यॉर्क टाइम्स’ की उस रिपोर्ट के जवाब में दिया, जिसमें अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पर घायलों की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया था।पार्नेल ने कहा कि सैनिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह जानकारी देने में जानबूझकर देरी की गई थी।
लगातार 10वें दिन अमेरिकी हवाई हमले जारी
तनाव के बीच सोमवार को भी दोनों पक्षों की ओर से भीषण सैन्य हमले जारी रहे। ईरान ने उन क्षेत्रों को निशाना बनाया जहाँ अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं, जिसके जवाब में अमेरिका ने लगातार 10वीं रात ईरान पर भीषण हवाई हमले किए। इस बीच, ईरान के प्रमुख समाचार पत्र ‘एत्तेलाअत’ ने चेतावनी दी है कि होर्मुज और बाब अल-मंदेब जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों को लंबे समय तक बंद रखना खुद ईरान के लिए भी नुकसानदेह साबित हो सकता है।
10 दिन के सीजफायर या बड़े हमले पर ट्रम्प का विचार
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस संकट को लेकर दो मुख्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। कतर, मिस्र और पाकिस्तान जैसे देशों ने अमेरिका और ईरान के बीच 10 दिनों के युद्धविराम का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, दोनों पक्षों ने अभी इसे मंजूरी नहीं दी है। सीजफायर की वार्ताओं के बीच अमेरिका ने क्षेत्र में अतिरिक्त लड़ाकू विमान तैनात कर अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत कर ली है, जबकि इजराइल भी बातचीत विफल होने की स्थिति में बड़े पैमाने पर नए सैन्य अभियान की तैयारी में जुटा है।
हूतियों का सऊदी अरब पर नाकेबंदी का ऐलान
एक तरफ वॉशिंगटन ने अमेरिका-ईरान जंग में अपने नुकसान को स्वीकारा है, तो दूसरी तरफ यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने संघर्ष का नया मोर्चा खोल दिया है। हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान करते हुए कहा है कि बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को सऊदी जहाजों के लिए पूरी तरह बंद किया जाएगा और उनके सभी पोत निशाने पर रहेंगे। इस कदम से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर भारी दबाव बढ़ने और युद्ध के व्यापक रूप से फैलने की आशंका जताई जा रही है।
