✍️ प्रहरी संवाददाता, मुंबई / नई दिल्ली | संसद के मानसून सत्र का पहला दिन ऐतिहासिक हंगामे, अभूतपूर्व सुरक्षा संकट और सड़क से लेकर सदन तक तीखे राजनीतिक टकराव का गवाह बना। पारंपरिक तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेस वक्तव्य से शुरू हुए सत्र के कुछ ही घंटों भीतर संसद परिसर के बाहर युद्ध जैसा माहौल बन गया।
देश में लगातार हो रहे पेपर लीक के खिलाफ विरोध दर्ज करा रहे प्रदर्शनकारी छात्र भारी सुरक्षा घेरे और कई स्तर के बैरिकेड्स तोड़कर जंतर-मंतर से निकलकर सीधे संसद भवन के मुहाने तक पहुंच गए। प्रेस क्लब के सामने स्थित संसद के बंद गेट तक प्रदर्शनकारियों के पहुंचने से अफरा-तफरी मच गई और त्वरित प्रतिक्रिया टीम (QRT) को मोर्चा संभालना पड़ा।
प्रदर्शनकारियों की अप्रत्याशित मौजूदगी के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियातन संसद परिसर के सभी प्रवेश और निकास द्वार पूरी तरह सील कर दिए। सांसदों और मंत्रियों की गाड़ियों की आवाजाही रोक दी गई, जबकि परिसर के भीतर इंटरनेट सेवाएं भी ठप कर दी गईं। करीब पौने एक बजे संसद की ऊंची दीवारों के बाहर से नारों की गूंज के साथ-साथ लगातार दागे जा रहे आंसू गैस के गोलों की आवाजें संसद के भीतर तक सुनाई देने लगीं। आसमान में धुएं का गुबार साफ देखा जा सकता था, जिससे परिसर में मौजूद सांसदों, सुरक्षाकर्मियों और मीडियाकर्मियों के बीच भारी बेचैनी फैल गई।
संसद के शार्दुल गेट के पास जमा हुए विपक्षी नेताओं ने इस प्रशासनिक कार्रवाई पर सरकार को आड़े हाथों लिया। कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने भड़कते हुए कहा कि किसानों पर वाटर कैनन और मासूम छात्रों पर आंसू गैस के गोले दागने वाली सरकार कायर है। वहीं, राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा की।
समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद डिंपल यादव भी इन प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंची थीं। सुरक्षा कारणों और संसद तक मार्च की अनुमति न होने के कारण दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। सपा नेताओं ने सरकार पर छात्रों के साथ संवाद न करने और लाठीचार्ज का आरोप लगाया। इस गिरफ्तारी के विरोध में समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं ने लखनऊ के हजरतगंज में भी प्रदर्शन किए और पुलिस से झड़प की।
विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अगर सरकार परीक्षाएं आयोजित कराने में असमर्थ है, तो उसे पद छोड़ देना चाहिए। छात्रों और युवाओं पर बल प्रयोग लोकतंत्र पर सीधा हमला है और यह सरकार सत्ता में रहने का नैतिक अधिकार खो चुकी है।
दूसरी तरफ, संसद मार्ग पर हुए इस भीषण बवाल में सुरक्षाबलों को भारी नुकसान पहुंचा है। दिल्ली पुलिस के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के उग्र होने और पत्थरबाजी की घटनाओं में 50 से अधिक पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों के जवान घायल हुए हैं। घायलों में IPS और DANIPS कैडर के अधिकारियों समेत करीब 10 वरिष्ठ पुलिस अफसर शामिल हैं। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और हिंसा फैलाने वाले उपद्रवियों के खिलाफ सख्त धाराओं में कई अलग-अलग प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
दिनभर चले इस अभूतपूर्व गतिरोध के बीच शाम को वार्ता का दौर भी शुरू हुआ। CJP के प्रतिनिधिमंडल, जिसमें प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका शामिल थे, ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा के आवास पर मुलाकात की।
केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि एक महीने से जारी इस आंदोलन में पहली बार प्रदर्शनकारियों की ओर से औपचारिक बातचीत की पहल हुई है। सरकार ने आंदोलनकारियों से धरना खत्म करने और शांति बहाल करने में सहयोग की अपील की है। हालांकि, देर शाम तक जंतर-मंतर पर बिजली आपूर्ति काटे जाने के बावजूद सैकड़ों छात्र अंधेरे में ही डटे रहे।


