✍️ प्रहरी संवाददाता, मुंबई / नई दिल्ली | देशभर की अदालतों में लंबित मुकदमों के बोझ के बीच न्याय मिलने की रफ्तार को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। संसद में दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भारत की जिला अदालतों में स्वीकृत न्यायिक पदों में से लगभग एक-चौथाई (23.68%) पद खाली पड़े हैं। वहीं, न्याय व्यवस्था के ऊपरी स्तर यानी देशभर के उच्च न्यायालयों (हाई कोर्ट्स) में भी स्वीकृत जजों के करीब एक-तिहाई (30.39%) पद फिलहाल रिक्त हैं।
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा संसद में एक अतारांकित प्रश्न के जवाब में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 17 जुलाई 2026 तक देश की निचली और जिला अदालतों में कुल 30,868 स्वीकृत न्यायिक अधिकारियों में से केवल 23,558 अधिकारी ही कार्यरत हैं। यानी पूरे देश में 7,310 पद खाली हैं।
राज्यों का हाल: कर्नाटक में सबसे ज्यादा संकट, यूपी में 1000+ पद खाली
आंकड़ों का विश्लेषण करें तो जहां चंडीगढ़ और दमन एवं दीव जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में एक भी पद खाली नहीं है, वहीं कई राज्यों में स्थिति बेहद गंभीर है।
कर्नाटक: बड़े राज्यों में सबसे खराब स्थिति कर्नाटक की है, जहां 58% से अधिक न्यायिक पद खाली पड़े हैं।
उत्तर प्रदेश: देश में सबसे ज्यादा न्यायिक पदों की जरूरत वाले राज्य यूपी में 1,000 से ज्यादा पद खाली हैं, यहां रिक्ति दर 29.24% है।
ओडिशा: ओडिशा में खाली पदों की दर 27.81% दर्ज की गई है।
बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ओडिशा को पिछले पांच वर्षों में केंद्र प्रायोजित योजना के तहत 146.42 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जबकि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 25.37 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
हाई कोर्टों में 30% से अधिक पद खाली, सिफारिशों में देरी बड़ी वजह
उच्च न्यायालयों की बात करें तो 1 जुलाई 2026 तक देश के सभी 25 हाई कोर्टों में जजों के कुल 1,122 स्वीकृत पद हैं, लेकिन केवल 781 जज ही कार्यरत हैं। यानी 341 जजों के पद खाली हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 217 और 224 के तहत होने वाली जजों की नियुक्तियों की प्रक्रिया ‘मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर’ (MoP) के तहत होती है। इसके तहत पद खाली होने से 6 महीने पहले सिफारिश भेजने का नियम है, लेकिन सरकार के अनुसार इस समय-सीमा का “शायद ही कभी पालन किया जाता है।”
हाईकोर्ट्स के मुख्य ‘हॉटस्पॉट्स’
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट: सबसे ज्यादा 52% पद खाली।
झारखंड हाई कोर्ट: 48% पद खाली।
ओडिशा हाई कोर्ट: 45.45% पद खाली।
कलकत्ता हाई कोर्ट: 43.06% पद खाली।
इलाहाबाद और मद्रास हाई कोर्ट: मुकदमों के भारी बोझ वाले इन बड़े हाई कोर्टों में भी 32% से अधिक पद खाली हैं।
