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सीयूईटी-यूजी 2026 में तकनीकी खामी से लाखों छात्र परेशान, विपक्ष ने सरकार को घेरा; शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज

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राहुल गांधी बोले- ‘विश्वगुरु’ का दावा करने वाले एक परीक्षा भी ठीक से नहीं करा सकते

✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई | ‘सीयूईटी-यूजी 2026’ परीक्षा के दौरान कुछ केंद्रों पर आई तकनीकी खराबी ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। नीट (NEET) के बाद अब कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) में हुई गड़बड़ी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ चौतरफा मोर्चा खोल दिया है। सांसद राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि ‘विश्वगुरु’ का दावा करने वाले लोग एक परीक्षा भी ठीक से नहीं करा  सकते। कांग्रेस ने परीक्षा में ‘आरएसएस नेटवर्क’ के दखल का आरोप लगाया। हालांकि एनटीए ने टीसीएस की गड़बड़ी पर सफाई दी है।

शनिवार को मुख्य विपक्षी दल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि दोनों नेताओं की जुगलबंदी देश की शिक्षा व्यवस्था को चौपट कर लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को दोहराते हुए कहा कि मंत्री की अक्षमता, अहंकार और संवेदनहीनता पूरी तरह उजागर हो चुकी है। रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की पीड़ा को दरकिनार कर केवल प्रधानमंत्री की छवि चमकाने में जुटी है, जबकि पीएम इस संवेदनशील मुद्दे पर पूरी तरह मौन हैं। उन्होंने एनटीए पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार भ्रष्ट ठेकेदारों और आरएसएस नेटवर्क से जुड़े आउटसोर्स कर्मचारियों को बचाने का प्रयास कर रही है।

वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी तीखा तंज कसते हुए कहा कि खुद को ‘विश्वगुरु’ बताने वाली सरकार एक भी परीक्षा को निष्पक्ष और सुचारू ढंग से आयोजित कराने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।

इस राजनीतिक घमासान के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने सफाई पेश की है। एनटीए के मुताबिक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के स्तर पर आई तकनीकी खराबी के कारण कुछ केंद्रों पर परीक्षा शुरू होने में देरी हुई थी, जिसे बाद में दुरुस्त कर लिया गया।

परीक्षार्थियों की सहूलियत के लिए दोपहर के सत्र की परीक्षा का समय संशोधित कर 3:00 बजे के बजाय शाम 4:00 बजे किया गया। फिलहाल, देश की इस सबसे बड़ी स्नातक प्रवेश परीक्षा में आई इस बाधा ने राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा प्रणालियों की विश्वसनीयता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 


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