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48 हजार करोड़ रुपये डकार गए घोटालेबाज

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आरबीआई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा- डिजिटल फ्रॉड में भारी गिरावट, लेकिन कॉर्पोरेट लोन घोटालों ने सरकारी बैंकों की नींद उड़ाई; 314 पुराने मामलों की दोबारा एंट्री से बढ़ा

✍️ प्रहरी संवाददाता, मुंबई | देश के बैंकिंग सेक्टर में धोखाधड़ी का एक बेहद चिंताजनक ट्रेंड सामने आया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के मुताबिक, बैंक फ्रॉड के मामलों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद धोखाधड़ी की कुल रकम तेजी से बढ़कर ₹48,021 करोड़ तक पहुंच गई। पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह राशि ₹32,803 करोड़ थी।

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, एक लाख रुपये और उससे अधिक के फ्रॉड मामलों की संख्या लगातार घट रही है। वर्ष 2023-24 में ऐसे 35,800 मामले दर्ज हुए थे, जो 2024-25 में घटकर 23,722 रह गए और 2025-26 में यह संख्या केवल 10,114 तक सिमट गई।

हालांकि, मामलों की संख्या कम होने के बावजूद बड़े कॉर्पोरेट लोन और एडवांस से जुड़े घोटालों ने बैंकों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है।
रिपोर्ट बताती है कि कुल फ्रॉड राशि का करीब 85 प्रतिशत हिस्सा यानी ₹40,774 करोड़ केवल लोन और एडवांस से जुड़े मामलों का है। इस श्रेणी में मामलों की संख्या भी बढ़कर 8,640 हो गई, जबकि पिछले वर्ष यह 7,924 थी। इससे साफ संकेत मिलता है कि बैंकिंग सिस्टम के लिए सबसे बड़ा खतरा अब बड़े कर्ज घोटाले बन चुके हैं।

सरकारी बैंकों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में धोखाधड़ी की राशि बढ़कर ₹35,709 करोड़ हो गई, जो कुल फ्रॉड का लगभग 74.5 प्रतिशत है। पिछले वर्ष यह आंकड़ा ₹23,617 करोड़ था। हालांकि मामलों की संख्या 6,916 से घटकर 5,418 रह गई। वहीं निजी बैंकों में फ्रॉड की रकम ₹8,927 करोड़ से बढ़कर ₹11,399 करोड़ हो गई, जबकि मामलों की संख्या 14,024 से घटकर 3,956 पर आ गई।

डिजिटल पेमेंट सेक्टर में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। कार्ड, इंटरनेट और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन से जुड़े फ्रॉड मामलों में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई। ऐसे मामलों की संख्या पिछले वर्ष के 13,332 से घटकर केवल 293 रह गई, जबकि धोखाधड़ी की रकम ₹517 करोड़ से घटकर ₹29 करोड़ पर आ गई।

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट किए गए सभी मामले जरूरी नहीं कि इसी वित्तीय वर्ष में हुए हों। कई पुराने मामलों को सुप्रीम कोर्ट के 27 मार्च 2023 के फैसले के अनुपालन में दोबारा वर्गीकृत कर शामिल किया गया है। इनमें 314 मामले ऐसे हैं, जिनकी कुल राशि करीब ₹30,199 करोड़ है।


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