✍️ प्रहरी संवाददाता मुंबई | देश की सबसे प्रतिष्ठित अदालतों में शुमार बॉम्बे हाई कोर्ट (बंबई उच्च न्यायालय) इस समय मुकदमों के भारी बोझ तले दबा हुआ है। नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बॉम्बे हाई कोर्ट की प्रिंसिपल बेंच (अपीलीय पक्ष) में कुल लंबित मामलों का आंकड़ा 64 लाख 57 हजार 139 तक पहुंच गया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन कुल लंबित मामलों में से 74.10 प्रतिशत यानी 47 लाख 84 हजार 939 मामले एक साल से भी अधिक समय से न्याय के इंतजार में लटके हुए हैं। अदालत में दीवानी और फौजदारी मुकदमों की बढ़ती संख्या ने न्याय व्यवस्था की रफ्तार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अदालत में लंबित मुकदमों के वर्गीकरण को देखें तो दीवानी (सिविल) मामलों की संख्या फौजदारी (क्रिमिनल) मामलों की तुलना में काफी अधिक है। आंकड़ों के मुताबिक, इस समय कुल 44 लाख 98 हजार 755 दीवानी मामले लंबित हैं, जिनमें से 74.95 प्रतिशत यानी 33 लाख 71 हजार 682 मामले एक वर्ष से ज्यादा पुराने हैं। दूसरी ओर, फौजदारी मुकदमों का कुल आंकड़ा 19 लाख 58 हजार 384 है, जिसमें से 72.16 प्रतिशत यानी 14 लाख 13 हजार 257 मामले बीते एक साल से अधिक समय से प्रक्रिया में ही अटके हुए हैं।
मामलों की उम्र के आधार पर किए गए विश्लेषण से न्याय में होने वाली देरी की एक बेहद स्याह तस्वीर सामने आती है। अदालत में कुल लंबित मुकदमों का 23 प्रतिशत हिस्सा ऐसा है जो पिछले दस साल से भी अधिक समय से अंतिम फैसले का इंतजार कर रहा है। इसके अलावा, 21 प्रतिशत मामले पांच से दस साल पुराने हैं, जबकि 11 प्रतिशत मामले तीन से पांच साल की अवधि से लंबित चल रहे हैं। 19 प्रतिशत मुकदमों की उम्र एक से तीन साल के बीच है, और केवल 26 प्रतिशत मामले ही ऐसे हैं जिन्हें दर्ज हुए अभी एक साल से कम का समय हुआ है।
इन मुकदमों में दीवानी मामलों का पलड़ा हर आयु वर्ग में भारी है। एक वर्ष से कम पुराने मामलों में 67 प्रतिशत दीवानी और 33 प्रतिशत फौजदारी मामले हैं। वहीं, दस साल से अधिक पुराने मामलों में भी यही अनुपात (67 प्रतिशत दीवानी और 33 प्रतिशत फौजदारी) बना हुआ है, जो यह दर्शाता है कि जमीन-जायदाद और दीवानी विवाद दशकों तक अदालतों के चक्कर काटते रहते हैं।
यदि मुकदमों की प्रकृति के आधार पर गौर किया जाए, तो रिट याचिकाओं (Writ Petitions) का अंबार सबसे बड़ा है। इस श्रेणी में 18 लाख 13 हजार 884 दीवानी और 1 लाख 3 हजार 495 फौजदारी मामले लंबित हैं। इसके बाद अपीलों का नंबर आता है, जिसमें 4 लाख 10 हजार 365 दीवानी और 7 लाख 75 हजार 645 फौजदारी अपीलें शामिल हैं। आवेदन (एप्लीकेशन) के तहत 4 लाख 39 हजार 1 दीवानी और 4 लाख 59 हजार 742 फौजदारी मामले पेंडिंग हैं। अन्य श्रेणियों में 5 लाख 13 हजार 439 प्रथम अपील, 3 लाख 10 हजार 926 द्वितीय अपील, 2 लाख 67 हजार 162 दीवानी केस/याचिकाएं और 2 लाख 9 हजार 186 फौजदारी केस/याचिकाएं शामिल हैं। इसके साथ ही, 1 लाख 1 हजार 66 दीवानी पुनरीक्षण (रिवीजन) और 2 लाख 62 हजार 413 फौजदारी पुनरीक्षण मामले भी लंबित सूचियों में दर्ज हैं।
राहत की बात सिर्फ इतनी है कि अदालत नए मुकदमों को दर्ज करने के साथ-साथ उनके निपटारे की गति को भी बनाए रखने का प्रयास कर रही है। चालू वर्ष में अब तक कुल 13 लाख 62 हजार 713 नए मामले संस्थान में आए हैं, जिनमें 7 लाख 95 हजार 720 दीवानी और 5 लाख 66 हजार 993 फौजदारी मामले शामिल हैं। इसके मुकाबले इसी वर्ष 12 लाख 69 हजार 528 मामलों का निपटारा (डिस्पोजल) किया जा चुका है, जिसमें 7 लाख 57 हजार 521 दीवानी और 5 लाख 12 हजार 7 मुकदमों को बंद किया गया है। पिछले एक महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो अदालत में 1 लाख 69 हजार नए मामले आए, जिसके सामने न्यायाधीशों ने मुस्तैदी दिखाते हुए 1 लाख 39 हजार 184 मामलों का निपटारा किया। हालांकि कई बार मामले की मुख्य विषय-वस्तु (Merit) तक पहुंचने से पहले ही तकनीकी कमियों के कारण मुकदमा खारिज हो जाता है।
