सर्विस, इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित रिटेल लोन से बैंकिंग सेक्टर को मिलेगी मजबूती
हेजिंग कॉस्ट घटने और सॉफ्ट बॉन्ड यील्ड से बड़े कर्जदारों का बदला मिजाज
✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई | देश के बैंकिंग क्षेत्र में लोन यानी क्रेडिट ग्रोथ की स्थिति आगामी वित्त वर्ष 2027 तक स्वस्थ बनी रहेगी, लेकिन इसकी रफ्तार में धीरे-धीरे नरमी आने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। केयरएज रेटिंग्स (CareEdge Ratings) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह यह है कि बड़े कॉरपोरेट कर्जदार, इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियां और एनबीएफसी अपनी वित्तीय जरूरतों के लिए अब पूरी तरह बैंकों पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू बॉन्ड मार्केट (ऋण बाजार) और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स (ECB) यानी विदेशी फंडिंग जैसे विविध विकल्पों को तरजीह दे रहे हैं। हालांकि, बाजार में लिक्विडिटी (नकदी) की स्थिति में सुधार, सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे पर लगातार किए जा रहे पूंजीगत व्यय (Capex) और मजबूत घरेलू मांग के चलते बैंकों के पास लोन की मांग का आधार मजबूत बना रहेगा।
आंकड़ों के नजरिए से देखें तो मई 2026 में नॉन-फूड बैंक क्रेडिट (गैर-खाद्य बैंक ऋण) में सालाना आधार पर 17.4 प्रतिशत की शानदार चौतरफा बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इस विकास दर में सबसे बड़ा योगदान सर्विस सेक्टर का रहा, जिसने मई में सालाना आधार पर 20.4 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की। यह लगातार छठा ऐसा महीना था, जब सर्विस सेक्टर ने बाकी सभी प्रमुख क्षेत्रों को पीछे छोड़ दिया, जिसे मुख्य रूप से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) और कमर्शियल रियल एस्टेट से भारी समर्थन मिला।
औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Credit) की बात करें तो इंजीनियरिंग, मेटल्स, केमिकल्स, पावर और ट्रांसपोर्ट जैसे उप-क्षेत्रों में बड़े कॉरपोरेट्स की मजबूत मांग के कारण लोन ग्रोथ को लगातार सहारा मिल रहा है। साथ ही, बेहतर औपचारिकता (Formalisation) के चलते एमएसएमई (MSME) क्षेत्र को भी नीतिगत लाभ मिल रहा है।
बुनियादी ढांचा ऋण (Infrastructure Financing) के तहत बिजली क्षेत्र सबसे बड़ा ग्रोथ ड्राइवर बना हुआ है, जहां रिन्यूएबल एनर्जी, ट्रांसमिशन नेटवर्क और थर्मल पावर क्षमता में भारी निवेश हो रहा है, जबकि लॉजिस्टिक्स विस्तार के कारण पोर्ट्स (बंदरगाहों) के विकास के लिए भी कर्ज की मांग मजबूत है।
इसी तरह, रिटेल लेंडिंग (व्यक्तिगत ऋण) के मोर्चे पर बैंकों ने अपनी रणनीति बदली है। क्रेडिट कार्ड जैसे असुरक्षित ऋणों (Unsecured Loans) के लिए सख्त अंडरराइटिंग मानकों के कारण इस सेगमेंट में ग्रोथ धीमी रहने की आशंका है। इसके विपरीत, सुरक्षित ऋण (Secured Loans) जैसे व्हीकल फाइनेंस और हाउसिंग लोन व्यक्तिगत ऋण क्षेत्र को गति देते रहेंगे।
सोने की ऊंची कीमतों के कारण गोल्ड लोन सबसे तेजी से बढ़ने वाले सेगमेंट में से एक बना रहेगा, जबकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाली नीतियों के दम पर कृषि ऋण (Agriculture Credit) में दहाई अंकों (Double Digit) की वृद्धि जारी रहेगी।
तकनीकी स्तर पर, रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट यानी FCNR(B) डिपॉजिट के लिए दिए गए प्रोत्साहनों से बैंकों की लिक्विडिटी स्थिति सुधरेगी और लोन-टू-डिपॉजिट अंतर कम होगा। हालांकि, विदेशी कर्ज के लिए हेजिंग लागत (Hedging Costs) में आई कमी और घरेलू बाजार में सॉफ्ट सरकारी बॉन्ड यील्ड (Softer Bond Yields) के चलते बड़े कॉरपोरेट्स के लिए बैंकों की तुलना में सीधे बाजार से पैसा उठाना अधिक सस्ता और सुलभ हो गया है, जिससे बैंक क्रेडिट ग्रोथ की रफ्तार आने वाले समय में सामान्य स्तर पर आ जाएगी।