संघीय अदालत में डीओजे ने किया केस वापस लेने का बचाव
बोला- यह कानूनी रूप से कमजोर, कूटनीतिक रूप से अनुचित और अमेरिकी प्राथमिकताओं के खिलाफ था
✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, न्यूयॉर्क/ मुंबई/ नई दिल्ली | अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) ने भारतीय उद्योगपति गौतम अदाणी और सात अन्य के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को वापस लेने के अपने फैसले का संघीय अदालत में जोरदार बचाव किया है। विभाग ने अदालत से स्पष्ट कहा कि यह मुकदमा कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण, कूटनीतिक रूप से प्रतिकूल और ट्रंप प्रशासन की प्रवर्तन प्राथमिकताओं के विपरीत था। डीओजे ने अपने 10 पन्नों के हलफनामे में यहां तक कहा कि यह मामला ‘एक साल पहले ही समाप्त कर दिया जाना चाहिए था या फिर इसे कभी दायर ही नहीं किया जाना चाहिए था।’
यह हलफनामा अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस गराउफिस के उस आदेश के बाद दाखिल किया गया, जिसमें उन्होंने सरकार से पूछा था कि वह आरोपपत्र को स्थायी रूप से खारिज करने की मांग क्यों कर रही है। न्याय विभाग ने अदालत को बताया कि अभियोजन वापस लेने के फैसले की न्यायिक समीक्षा का दायरा बेहद सीमित है और सरकार के विवेकाधिकार में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।
डीओजे के प्रिंसिपल एसोसिएट डिप्टी अटॉर्नी जनरल आर. ट्रेंट मैककॉटर ने कहा कि यह निर्णय बचाव पक्ष के साथ महीनों तक चली बैठकों, सैकड़ों दस्तावेजों की समीक्षा और विस्तृत कानूनी विश्लेषण के बाद लिया गया। उन्होंने कहा, “मामला खारिज करने का फैसला बिल्कुल कठिन नहीं था।”
न्याय विभाग ने अदालत को बताया कि कथित घटनाएं लगभग पूरी तरह भारत में हुईं, भारतीय एजेंसियों ने किसी दंडनीय अपराध की पुष्टि नहीं की, निवेशकों को कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ और अधिकांश साक्ष्य व गवाह अमेरिका से बाहर हैं। विभाग के अनुसार, यह मूल रूप से एक विदेशी मामला है और ऐसे मामलों में अमेरिका की आपराधिक कार्रवाई कूटनीतिक तनाव बढ़ा सकती है।
डीओजे ने यह भी दलील दी कि प्रतिभूति धोखाधड़ी के आरोप कानूनी रूप से कमजोर थे, क्योंकि संबंधित लेनदेन अमेरिकी अधिकार क्षेत्र की शर्तों पर खरे नहीं उतरते। विभाग के अनुसार, आरोपपत्र में जिन बयानों का उल्लेख किया गया, वे सामान्य कॉरपोरेट दावे थे, जिन पर अनुभवी निवेशक भरोसा नहीं करते। इसलिए, यदि कोई विवाद बनता भी था तो वह अधिकतम दीवानी प्रकृति का हो सकता था, आपराधिक नहीं।
गौरतलब है कि वर्ष 2024 में बाइडन प्रशासन के दौरान अदाणी और अन्य पर भारतीय अधिकारियों को 25 करोड़ डॉलर की कथित रिश्वत योजना तथा निवेशकों को गुमराह कर अरबों डॉलर जुटाने का आरोप लगाया गया था। अब अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत से इस मामले को जल्द समाप्त करने का अनुरोध करते हुए कहा है कि सरकार स्वयं अब इस अभियोजन को आगे नहीं बढ़ाना चाहती।