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2021 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा अनसोल्ड स्टॉक, 6.16 लाख घरों पर नहीं मिले ग्राहक

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  • टॉप-7 शहरों में बिक्री 6% घटी, लेकिन बिल्डरों ने बढ़ा दिए नए प्रोजेक्ट

  • बाजार में बढ़ती सप्लाई और सुस्त मांग के बीच बढ़ा दबाव

✍️ प्रहरी संवाददाता मुंबई | देश के रियल एस्टेट बाजार में मांग और आपूर्ति का संतुलन तेजी से बिगड़ता दिखाई दे रहा है। घरों की बिक्री धीमी पड़ने के बावजूद डेवलपर्स नए प्रोजेक्ट बाजार में उतारते जा रहे हैं, जिसके चलते तैयार और निर्माणाधीन लेकिन बिना बिके मकानों का स्टॉक 2021 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। देश के सात प्रमुख शहरों में जून 2026 के अंत तक उपलब्ध आवासीय इन्वेंट्री बढ़कर 6.16 लाख इकाइयों से अधिक हो गई, जो एक वर्ष पहले 5.62 लाख इकाइयों के स्तर पर थी। यानी केवल एक साल में बाजार पर 54 हजार से अधिक अतिरिक्त घरों का बोझ बढ़ गया।

रियल एस्टेट कंसल्टेंसी कंपनी एनारॉक की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 तिमाही में शीर्ष सात शहरों में कुल 90,715 घरों की बिक्री हुई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में बिके 96,285 घरों की तुलना में 6 प्रतिशत कम है। इसके विपरीत, इसी अवधि में 1.06 लाख नई आवासीय इकाइयों की लॉन्चिंग हुई, जो सालाना आधार पर 7 प्रतिशत अधिक है। यानी बाजार में जितने घर बिक रहे हैं, उससे कहीं अधिक तेजी से नए प्रोजेक्ट जुड़ रहे हैं।

कोविड महामारी के बाद 2021 से 2024 के बीच कम ब्याज दरों और मजबूत मांग के कारण डेवलपर्स तेजी से इन्वेंट्री कम करने में सफल रहे थे। लेकिन 2025 के बाद ऊंची संपत्ति कीमतों, महंगे होम लोन और खरीदारों की बदली प्राथमिकताओं ने बिक्री की रफ्तार धीमी कर दी है। इसके बावजूद डेवलपर्स ने प्रोजेक्ट लॉन्च की आक्रामक रणनीति जारी रखी, जिसका सीधा असर अनसोल्ड स्टॉक में दिखाई दे रहा है।

सबसे अधिक दबाव बेंगलुरु में दर्ज किया गया, जहां उपलब्ध इन्वेंट्री एक वर्ष में 34 प्रतिशत बढ़कर करीब 79,180 इकाइयों तक पहुंच गई। इसके विपरीत दिल्ली-एनसीआर एकमात्र ऐसा बाजार रहा, जहां उपलब्ध स्टॉक लगभग स्थिर बना रहा। हालांकि कीमतों के मोर्चे पर एनसीआर ने ही सबसे तेज 13 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की।

दिलचस्प बात यह है कि बाजार का फोकस अब किफायती आवास से हटकर प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट की ओर तेजी से स्थानांतरित हो चुका है। 80 लाख से 1.5 करोड़ रुपये की श्रेणी वाले घरों की नई आपूर्ति में सबसे बड़ी 27 प्रतिशत हिस्सेदारी रही, जबकि 1.5 करोड़ से 2.5 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट 25 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहे। इसके विपरीत 40 लाख रुपये से कम कीमत वाले किफायती घरों की हिस्सेदारी घटकर केवल 6 प्रतिशत रह गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार की भौगोलिक तस्वीर भी तेजी से बदल रही है। मुंबई महानगर क्षेत्र और बेंगलुरु ने कुल बिक्री का लगभग 48 प्रतिशत हिस्सा अपने नाम किया, जबकि नई आपूर्ति में भी इन दोनों शहरों की हिस्सेदारी 53 प्रतिशत रही। दूसरी ओर हैदराबाद में नए प्रोजेक्ट लॉन्च में 53 प्रतिशत की सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई।


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