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महाराष्ट्र में भी लागू होगी समान नागरिक संहिता, ड्राफ्ट के लिए हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में बनेगी समिति

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✍️ प्रहरी संवाददाता मुंबई | महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा में इसका आधिकारिक ऐलान करते हुए गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने कहा कि यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए हाई कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में एक विशेष समिति गठित की जाएगी। यह समिति उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों के यूसीसी कानूनों का विस्तृत अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर महायुति सरकार आगे की कार्रवाई करेगी।

सदन में यह घोषणा बीजेपी विधायक देवयानी फरांदे द्वारा मुस्लिम महिलाओं से जुड़ी तीन तलाक की समस्याओं का मुद्दा उठाने के बाद हुई। चर्चा के दौरान गृह राज्य मंत्री ने बताया कि तीन तलाक की शिकायतें पूरे राज्य से आ रही हैं। साल 2024 में ऐसी 42 शिकायतें सही पाई गईं, जिनमें 137 आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई। वहीं, 2025 में अब तक इस मामले में 95 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। कदम ने उत्तराखंड के कानून का हवाला देते हुए कहा कि वहां बहुविवाह पर पूरी तरह प्रतिबंध है और उल्लंघन पर सात साल की सजा का प्रावधान है।

इस संवेदनशील मुद्दे पर सदन में सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। विपक्षी दल एनसीपी (एसपी) के विधायक जयंत पाटिल ने इस विषय को नियमों के खिलाफ बताते हुए चर्चा पर आपत्ति जताई, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने खारिज कर दिया। वहीं, सत्तापक्ष की ही एनसीपी (एपी) विधायक सना मलिक ने कहा कि महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों को केवल धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह राज्य में यूसीसी विधेयक लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।


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