-
लगातार दूसरे महीने विदेशी मुद्रा बाजार में की शुद्ध बिकवाली
✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई | वैश्विक अनिश्चितताओं, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार निकासी और रुपये पर बढ़ते चौतरफा दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने विदेशी मुद्रा बाजार में बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप किया है। केंद्रीय बैंक ने हाजिर मुद्रा बाजार में 8.94 अरब डॉलर की शुद्ध बिकवाली कर डॉलर के मुकाबले रुपये की ऐतिहासिक गिरावट को थामने की आक्रामक कोशिश की है।
आरबीआई के मासिक बुलेटिन में जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक यह लगातार दूसरा महीना है जब केंद्रीय बैंक को भारतीय मुद्रा को सहारा देने के लिए बाजार में सीधे डॉलर बेचकर उतरना पड़ा है, क्योंकि इससे पहले मार्च में भी आरबीआई ने 9.76 अरब डॉलर की शुद्ध बिकवाली की थी।
बुलेटिन के अनुसार, सकल आधार पर केंद्रीय बैंक ने अप्रैल के दौरान कुल 16.23 अरब डॉलर की खरीदारी की, जबकि इसके मुकाबले बाजार में 25.17 अरब डॉलर की भारी-भरकम बिक्री दर्ज की गई। लंबे समय से जारी वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और एफपीआई द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पूंजी निकालने के कारण अप्रैल और मई के महीनों में घरेलू रुपया लगातार दबाव में बना रहा।
हालांकि, हाल के दिनों में पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देने वाले नीतिगत उपायों, वैश्विक तनाव में आई आंशिक कमी और कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई नरमी के चलते जून 2026 में रुपये की स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला है।
चालू वित्त वर्ष में 19 जून तक रुपया मार्च 2026 के अंत की तुलना में 0.2 प्रतिशत मजबूत हुआ है। इस आंशिक रिकवरी के बावजूद सोमवार को विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 30 पैसे कमजोर होकर 94.63 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि पिछले वित्त वर्ष के अंत में 94.84 प्रति डॉलर पर बंद होने वाले रुपये को स्थिर रखने के लिए केंद्रीय बैंक के पास विदेशी मुद्रा भंडार का रणनीतिक उपयोग ही एकमात्र तात्कालिक जरिया बना हुआ है, जिससे आगामी तिमाहियों में मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता को बनाए रखा जा सके।
