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ईरान पर से पाबंदी हटने और अमेरिकी रणनीतिक बदलावों के बीच नया वैश्विक त्रिकोण

oil refinery
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  • भारत और अमेरिका के व्यापारिक समझौतों पर बढ़ी प्रगति, पाकिस्तान को मिला फायदा

✍️डिजिटल न्यूज डेस्क, वॉशिंगटन/नई दिल्ली |  अमेरिकी प्रशासन द्वारा ईरान पर से तेल निर्यात की पाबंदियां हटाए जाने और नवनिर्वाचित डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन की नई रणनीतिक प्राथमिकताओं के बाद मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक समीकरणों में बड़ा उलटफेर शुरू हो गया है। वैश्विक राजनीतिक गलियारों में अमेरिकी विदेश नीतियों में भारत के ‘घटते महत्व’ को लेकर जारी चर्चाओं के बीच दोनों देशों ने अपने व्यापारिक और सैन्य सहयोग को तेज करके इन अटकलों को खारिज कर दिया है।

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी प्राथमिकताओं में आ रहा यह बदलाव नई दिल्ली की कोई कूटनीतिक विफलता नहीं है, बल्कि यह वाशिंगटन द्वारा चीन को घेरने के लिए अपनी वैश्विक रणनीति का नए सिरे से किया जा रहा पुनर्मूल्यांकन है। ट्रम्प प्रशासन इस समय अपनी पूरी कूटनीतिक मशीनरी को एक नए ढांचे में ढाल रहा है, जिससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सीधे संतुलन बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।

इस वैश्विक उथल-पुथल के बीच फ्रांस के इवियन शहर में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई है।

भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय (PIB) और व्हाइट हाउस द्वारा जारी आधिकारिक बयानों के अनुसार, दोनों नेताओं ने ‘भारत-अमेरिका कॉम्पैक्ट’ समझौते के तहत रक्षा, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग की व्यापक समीक्षा की।

बैठक में सबसे बड़ी प्रगति दोनों देशों के बीच एक अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर हो रही वार्ताओं पर सामने आई है, जिसे अंतिम रूप देने के लिए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर अगले हफ्ते भारत के आधिकारिक दौरे पर आ रहे हैं। यह कूटनीतिक तेजी उस ऐतिहासिक घटनाक्रम के बाद आई है, जिसमें अमेरिकी प्रशासन ने भारत पर लागू पारस्परिक टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की थी, जिसके बदले भारत ने भी अगले पांच वर्षों में अमेरिकी ऊर्जा और सूचना प्रौद्योगिकी उत्पादों की खरीद को बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करने की प्रतिबद्धता जताई है।

दूसरी ओर, ईरान पर से तेल निर्यात की पाबंदी हटने का सबसे बड़ा फायदा उन कंपनियों को होने जा रहा है जो बीते 47 साल से आर्थिक बंदिशों के कारण ईरान छोड़कर चली गई थीं और अब दोबारा लौट रही हैं। ये व्यापारिक इकाइयां मुख्य रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के उस व्यापक नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो तुर्की की सीमाओं से लेकर पाकिस्तान के बलूचिस्तान तक फैला है।

पाबंदियों के दौर में भी बलूचिस्तान सीमा पर अलसुबह बाइक से कैनों में भरकर पेट्रोल-डीजल लाने वाले स्थानीय लोग पाकिस्तान के छोटे बंदरगाहों के रास्ते इसे भारत और बांग्लादेश के बाजारों में पहुंचाते थे, जिससे एक बाइकर रोजाना करीब ₹5,000 तक कमा लेता था। अब इस तेल व्यापार के कानूनी दायरे में आने से दक्षिण एशियाई तेल आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह सुधर जाएगी।

हालांकि, इस फैसले से ईरान के राजस्व में होने वाली बढ़ोतरी का सीधा फायदा हमास, हिजबुल्लाह और हुती विद्रोहियों जैसे उग्रवादी गुटों को भी होगा, जिनके पास अब आधुनिक मिसाइलें और हथियार पहुंचने का रास्ता साफ हो गया है।


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