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मार्च के ऑल-टाइम हाई से 12% तक टूटा सोना
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डॉलर की मजबूती और ऊंची ब्याज दरों के संकेतों ने बढ़ाया दबाव
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निवेशकों की नजर अब वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और त्योहारी मांग पर
✍️ प्रहरी संवाददाता मुंबई | अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति, डॉलर की मजबूती और वैश्विक बाजारों में तेज बिकवाली के दबाव ने भारतीय सर्राफा बाजार में सोने की चमक फीकी कर दी है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने के अगस्त वायदा अनुबंध में गुरुवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान कीमतें करीब 2.93 प्रतिशत या ₹4,500 से अधिक टूटकर ₹1,49,378 प्रति 10 ग्राम के स्तर तक आ गईं। सत्र के दौरान सोना ₹1,52,831 के ऊपरी स्तर तक पहुंचा, लेकिन बिकवाली के दबाव में यह ₹1,48,859 प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर को भी छू गया। शुक्रवार को भी गोल्ड 4500 अंक फिसलकर 1,45,710 के निचले स्तर पर पहुंच गया था।
MCX और इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में 24 कैरेट सोना करीब ₹1,69,349 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। मौजूदा स्तरों को देखें तो घरेलू बाजार में सोना अपने ऐतिहासिक शिखर से करीब 11 से 12 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा है। यानी तीन महीने से भी कम समय में कीमतों में लगभग ₹20,000 प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई है।
अर्थ भारत इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के मैनेजिंग पार्टनर सचिन सावरिकर का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने पर दबाव लगातार बढ़ा है। जनवरी में 5,595 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद वैश्विक कीमतों में लगभग 24 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है।
बता दें कि भारत अपनी स्वर्ण खपत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों और डॉलर-रुपया विनिमय दर में होने वाले बदलावों का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। हालांकि मई में केंद्र सरकार द्वारा सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने से अंतरराष्ट्रीय गिरावट का पूरा असर भारतीय बाजार में नहीं दिखा और घरेलू कीमतों को कुछ सहारा मिला।
कमोडिटी बाजार के जानकारों के मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक महंगाई की चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है। इसके चलते अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने के संकेत दिए हैं। ऊंची ब्याज दरों के कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स मजबूत हुए हैं, जिससे निवेशक सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों से पूंजी निकालकर डॉलर आधारित निवेशों की ओर रुख कर रहे हैं। बाजार में लीवरेज्ड पोजीशंस के तेजी से बंद होने और मार्जिन कॉल्स ने भी बिकवाली को और तेज कर दिया।
इस बीच, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के कारण भारतीय खुदरा बाजार में मांग फिलहाल सुस्त बनी हुई है। ज्वेलर्स और उपभोक्ता दोनों कीमतों के स्थिर होने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि बाजार की नजर अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, डॉलर की दिशा और आगामी त्योहारी सीजन की मांग पर टिकी हुई है।
