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‘ऑपरेशन सिंदूर’ के शहीदों के नाम अब क्यों? एक साल बाद हुए खुलासे ने खड़े किए असहज सवाल, सियासत में मचा सियासी घमासान

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  • राष्ट्रीय समर स्मारक की ‘त्याग चक्र’ दीवार पर दर्ज हुए 6 जांबाजों के नाम

  • विपक्ष का सवाल- जब कोई नुकसान नहीं हुआ था तो ये शहादतें किसकी थीं?

  • सरकार पर संसद और देश से अधूरी जानकारी साझा करने के आरोप तेज

✍️ प्रहरी संवाददाता, मुंबई / नई दिल्ली | 
मई 2025 में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थित आतंकी ठिकानों के खिलाफ भारत द्वारा चलाए गए सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय समर स्मारक की ‘त्याग चक्र’ दीवार पर इस अभियान के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले छह सैन्यकर्मियों के नाम अंकित होने के बाद पहली बार उनकी पहचान सार्वजनिक रूप से सामने आई है। इसके साथ ही विपक्ष ने सरकार से तीखे सवाल पूछने शुरू कर दिए हैं।

विपक्ष का आरोप है कि यदि अभियान के दौरान भारतीय सेनाओं को कोई क्षति नहीं पहुंची थी, तो फिर इन जवानों की शहादत की जानकारी देश से एक वर्ष तक दूर क्यों रखी गई। विपक्षी दलों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के कारण तत्काल जानकारी सार्वजनिक न करना एक अलग विषय हो सकता है, लेकिन बाद में भी आधिकारिक स्तर पर चुप्पी बनाए रखना कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को संसद की गरिमा और सरकार की जवाबदेही से जोड़ते हुए केंद्र सरकार को घेरा है। कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने संसद में दिए गए सरकारी बयानों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि देश और सदन को वास्तविक स्थिति से पूरी तरह अवगत नहीं कराया गया। विपक्ष का कहना है कि लोकतंत्र में सरकार की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास होता है और यह विश्वास तथ्यों की पारदर्शिता से ही कायम रहता है।

विपक्ष ने इसे “शहादत पर सन्नाटा और सफलता पर शोर” की राजनीति बताया है। राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन सैनिकों ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, उनकी वीरगाथा देश तक पहुंचने में एक वर्ष क्यों लग गया। आलोचकों का कहना है कि अभियान की सफलता और उसके राजनीतिक संदेश को प्रमुखता से सामने रखा गया, लेकिन इसकी कीमत चुकाने वाले जवानों की शहादत लंबे समय तक सार्वजनिक चर्चा से दूर रही।

आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार इस अभियान में थलसेना के पांच और वायुसेना के एक सैनिक ने सर्वोच्च बलिदान दिया। इनमें सूबेदार मेजर पवन कुमार, वीर चक्र से सम्मानित राइफलमैन सुनील कुमार, लांस नायक दिनेश कुमार, हवलदार सुनील कुमार सिंह, अग्निवीर एम. मुरली नाइक और वायुसेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार शामिल हैं। अब इन सभी वीर जवानों के नाम राष्ट्रीय समर स्मारक की ‘त्याग चक्र’ दीवार और सम्मान सूची का हिस्सा बन चुके हैं।

गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 7 से 10 मई के बीच पाकिस्तान और पीओके में स्थित आतंकी ढांचों पर मिसाइल और हवाई हमले किए थे। उस समय सरकार ने इस अभियान को निर्णायक और सफल कार्रवाई बताया था। लेकिन अब शहीदों के नाम सार्वजनिक होने के बाद बहस का केंद्र सैन्य सफलता से अधिक सूचना साझा करने की प्रक्रिया और सरकारी पारदर्शिता पर आ गया है।

अब देश के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या राष्ट्र को उस अभियान की पूरी तस्वीर दिखाई गई थी, या फिर विजय की कहानी तो सामने रखी गई, लेकिन उसकी कीमत चुकाने वाले वीर जवानों के बलिदान को लंबे समय तक परदे के पीछे रखा गया?


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