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बलूचिस्तान ने खुद को आजाद देश किया घोषित !, कहा- ’85 फीसदी क्षेत्र पर हमारा कब्जा’

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‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ के वायरल पत्र ने उड़ाई इस्लामाबाद की नींद, जानिए धरातल पर कितनी सच है स्वतंत्रता की यह सनसनीखेज खबर

✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, नई दिल्ली/क्वेटा | सोशल मीडिया पर ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ (बलूचिस्तान गणराज्य) के नाम से एक कथित आधिकारिक पत्र (लेटर) तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि बलूचिस्तान ने पाकिस्तान से पूर्ण स्वतंत्रता हासिल कर खुद को एक आजाद मुल्क घोषित कर दिया है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित इस वायरल पत्र में चौंकाने वाले दावे किए गए हैं। पत्र के मुताबिक, बलूच स्वतंत्रता सेनानियों ने इस रणनीतिक सूबे के 85 प्रतिशत हिस्से पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित कर लिया है। इसके साथ ही क्षेत्र के तमाम प्राकृतिक संसाधनों, जिनमें गैस क्षेत्र, कोयला खदानें और प्रमुख खनिज भंडार शामिल हैं, पर नई सरकार का कब्जा होने की बात कही गई है।

पत्र में यह भी दावा है कि नई प्रशासनिक व्यवस्था के तहत बलूचिस्तान ने अपना नया राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और नई करेंसी (मुद्रा) भी लागू कर दी है। इसके अतिरिक्त, पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों में तैनात बलूच मूल के अधिकारियों और जवानों द्वारा बड़े पैमाने पर इस्तीफे देकर स्वतंत्रता आंदोलन का साथ देने का जिक्र है।

अंतरराष्ट्रीय मान्यता और आधिकारिक पुष्टि का अकाल

इस सनसनीखेज दावे की जमीनी हकीकत खंगालने पर पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों और धरातल पर इस ‘आजादी’ की कोई प्रामाणिकता नहीं है। समाचार लिखे जाने तक दुनिया की किसी भी संप्रभु सरकार, संयुक्त राष्ट्र (UN) या किसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्था ने बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के रूप में कोई मान्यता नहीं दी है।

रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह वायरल पत्र दरअसल निर्वासित बलूच कार्यकर्ताओं और राष्ट्रवादियों द्वारा चलाया जा रहा एक सुनियोजित ‘डिजिटल प्रोपेगैंडा’ और मनोवैज्ञानिक युद्ध (साइकोलॉजिकल वॉर) है, जिसका मकसद वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान को घेरना है।

गृहयुद्ध की दहलीज पर प्रांत, बढ़ा सैन्य दमन

भले ही कागजी तौर पर आजादी का यह दावा भ्रामक और जमीनी हकीकत से दूर हो, लेकिन इसने इस्लामाबाद और रावलपिंडी (पाकिस्तानी सैन्य मुख्यालय) की नींद जरूर उड़ा दी है। बलूचिस्तान में लंबे समय से पाकिस्तानी सेना के दमन और मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ भीषण जनाक्रोश है। प्रांत में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और अन्य विद्रोही गुटों द्वारा पाकिस्तानी फौज और चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के प्रोजेक्ट्स पर लगातार आत्मघाती और अत्याधुनिक हमले किए जा रहे हैं।

इस बीच बलूचिस्तान पुलिस, फ्रंटियर कोर (FC) और पाकिस्तानी सेना द्वारा चलाए गए संयुक्त सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन शाबान’ सहित हालिया हिंसक झड़पों में 100 से अधिक उग्रवादियों के मारे जाने की खबर है। हालांकि, इस भारी सैन्य घेराबंदी के बावजूद बलूच विद्रोहियों द्वारा सोशल मीडिया पर खुद को ‘आजाद’ घोषित कर देना यह साफ दर्शाता है कि बंदूक के दम पर बलूचिस्तान की आवाज को दबाने में पाकिस्तानी हुकूमत पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। फिलहाल, बलूचिस्तान भौगोलिक रूप से पाकिस्तान के ही नियंत्रण में है, लेकिन वैचारिक रूप से वह पूरी तरह गृहयुद्ध की चपेट में आ चुका है।


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