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क्लास-1 अफसर निकले सबसे बड़े घूसखोर; 2025 में 988 गिरफ्तार, नए साल के 21 दिनों में ही 58 भ्रष्टाचारियों पर गिरी ACB की गाज

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988 गिरफ्तार, 3.54 करोड़ की घूस बरामद, एसीबी रिपोर्ट से खुलासा 

✍️ प्रहरी संवाददाता, मुंबई | महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई ने प्रशासनिक तंत्र की चौंकाने वाली तस्वीर उजागर कर दी है। वर्ष 2025 के आधिकारिक आंकड़ों और वर्ष 2026 के शुरुआती 21 दिनों की कार्रवाई से साफ है कि सरकारी दफ्तरों में रिश्वतखोरी का नेटवर्क अब भी पूरी तरह सक्रिय है। सबसे बड़ा खुलासा यह है कि संख्या में भले ही निचले स्तर के कर्मचारी अधिक पकड़े गए हों, लेकिन मोटी रकम की घूस लेने में प्रथम श्रेणी के अधिकारी सबसे आगे पाए गए हैं।

एसीबी के वार्षिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में राज्यभर में भ्रष्टाचार के कुल 661 मामले दर्ज किए गए। विभिन्न ट्रैप और जांच कार्रवाइयों में 988 अधिकारियों, कर्मचारियों और बिचौलियों को गिरफ्तार किया गया। इन मामलों में मौके पर ही 3 करोड़ 54 लाख 49 हजार 695 रुपये की रिश्वत राशि बरामद की गई। यह पिछले वर्षों की तुलना में भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई के सबसे बड़े अभियानों में से एक माना जा रहा है।

नए साल में भी हालात बदलते नजर नहीं आ रहे हैं। एक जनवरी से 21 जनवरी 2026 के बीच महज तीन सप्ताह में ही एसीबी ने 41 नए मामले दर्ज कर 58 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस अवधि में 16 लाख 63 हजार 340 रुपये की रिश्वत राशि जब्त की गई है।

आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025 में 474 वर्ग-3 कर्मचारियों और बाबुओं से कुल 1 करोड़ 7 लाख 90 हजार 247 रुपये की रिश्वत राशि बरामद हुई, जबकि केवल 68 वर्ग-1 अधिकारियों के पास से 1 करोड़ 31 लाख 65 हजार 700 रुपये की घूस पकड़ी गई। इससे संकेत मिलता है कि ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारी कम मामलों में पकड़े जाने के बावजूद कहीं अधिक बड़ी रकम के लेन-देन में शामिल थे। वर्ष 2026 के शुरुआती 21 दिनों में भी यही प्रवृत्ति दिखाई दी, जहां वर्ग-1 और वर्ग-2 अधिकारियों के खिलाफ कई मामले दर्ज हुए।

विभागवार आंकड़ों में राजस्व एवं भूमि अभिलेख विभाग सबसे अधिक भ्रष्टाचार प्रभावित विभाग के रूप में सामने आया है। वर्ष 2025 में इस विभाग में 168 मामले दर्ज हुए और 61 लाख 89 हजार 90 रुपये की रिश्वत राशि बरामद की गई। वर्ष 2026 के शुरुआती दिनों में भी 12 नए मामलों के साथ यह विभाग शीर्ष पर बना हुआ है। जमीन की पैमाइश, नामांतरण और सात-बारा से जुड़े कार्यों में रिश्वतखोरी के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं।

महाराष्ट्र पुलिस विभाग वर्ष 2025 में 120 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर रहा, लेकिन बरामद रिश्वत राशि के मामले में यह सबसे ऊपर पहुंच गया। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों से 91 लाख 28 हजार 300 रुपये की घूस पकड़ी गई। वर्ष 2026 के शुरुआती 21 दिनों में भी पुलिस विभाग के खिलाफ चार मामले दर्ज हुए, जिनमें 4 लाख 20 हजार रुपये की रिश्वत राशि बरामद की गई। महावितरण (MSEDCL) भी भ्रष्टाचार के मामलों में शीर्ष विभागों में शामिल रहा।

एसीबी की कार्रवाई में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि अधिकारियों और कर्मचारियों के अलावा निजी एजेंटों और बिचौलियों की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2025 में गिरफ्तार किए गए 188 निजी दलालों से 1 करोड़ 34 लाख 23 हजार 531 रुपये की सबसे अधिक रिश्वत राशि बरामद हुई।

वर्ष 2026 के शुरुआती 21 दिनों में भी पांच निजी एजेंट गिरफ्त में आ चुके हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि कई मामलों में यही बिचौलिए अधिकारियों और आम नागरिकों के बीच रिश्वत के लेन-देन की कड़ी बनकर काम कर रहे हैं।

एसीबी ने मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पुणे, नागपुर समेत राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में डिजिटल निगरानी, ट्रैप कार्रवाई और औचक छापों का अभियान तेज कर दिया है। हालिया आंकड़े बताते हैं कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है और आने वाले महीनों में ऐसे मामलों में और तेजी आने की संभावना है।


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