✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई, नई दिल्ली | भारत के खिलाफ दुष्प्रचार और मनोवैज्ञानिक युद्ध की एक और कोशिश सामने आई है। सोशल मीडिया पर भारतीय सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी के नाम से एक डीपफेक वीडियो वायरल किया गया, जिसमें झूठा दावा किया गया कि भारत, इजराइल और ईरान से जुड़े किसी गुप्त सैन्य अभियान या रणनीति पर भारतीय सेना प्रमुख ने बयान दिया है। जांच में यह वीडियो पूरी तरह फर्जी और डिजिटल रूप से तैयार किया गया पाया गया है।
⚠️ सावधान! सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा अकाउंट्स AI-जनरेटेड वीडियो साझा कर रहे हैं, जिसमें एक व्यक्ति भारतीय वायुसेना के एक अधिकारी की नकल करते हुए भारतीय वायुसेना के बारे में फर्ज़ी दावे कर रहा है।#PIBFactCheck
❌ यह दावा फर्ज़ी है।
✅ यह वीडियो AI तकनीक का उपयोग… pic.twitter.com/rOEWfq488J
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) March 9, 2026
सुरक्षा एजेंसियों और साइबर विशेषज्ञों की प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह वीडियो पाकिस्तान समर्थित दुष्प्रचार नेटवर्क द्वारा तैयार किया गया हो सकता है। वीडियो में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का इस्तेमाल कर भारतीय सेना प्रमुख की आवाज़ और चेहरे को कृत्रिम रूप से जोड़कर ऐसा दिखाने की कोशिश की गई है, मानो वे किसी संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सैन्य योजना का खुलासा कर रहे हों।
🚨 Deepfake Video Alert
Pakistani propaganda accounts are sharing a digitally manipulated video of the Indian Army Chief General Upendra Dwivedi, making false claims that when the Iranian ship crossed the international waters, as Israeli strategic allies, it was our duty to… pic.twitter.com/itQ63pXGuF
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) March 9, 2026
रक्षा सूत्रों के अनुसार, भारतीय सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। सेना से जुड़े आधिकारिक स्रोतों ने स्पष्ट किया है कि वायरल वीडियो फर्जी, भ्रामक और भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया डिजिटल प्रोपेगैंडा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर राजनीतिक और सैन्य स्तर पर भ्रम फैलाने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। भारत को लेकर पाकिस्तान से संचालित कई सोशल मीडिया हैंडल पहले भी फर्जी वीडियो, फोटो और झूठे दावों के जरिए दुष्प्रचार फैलाने के आरोपों में सामने आ चुके हैं।
साइबर सुरक्षा एजेंसियां इस वीडियो के स्रोत, इसे बनाने वाले नेटवर्क और इसे वायरल करने वाले अकाउंट्स की पहचान करने में जुट गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां केवल फेक न्यूज नहीं बल्कि डिजिटल युद्ध और मनोवैज्ञानिक ऑपरेशन (Psychological Operations) का हिस्सा होती हैं, जिनका उद्देश्य जनता के बीच भ्रम और अविश्वास पैदा करना होता है।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी वीडियो या संदेश को साझा करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि अवश्य करें।
