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महाराष्ट्र पर कर्ज का बोझ: हर नागरिक पर करीब एक लाख रुपये का भार, विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल

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  • कर्ज और कर्ज की गारंटी मिलाकर लगभग 12 लाख करोड़ रुपये का भारी बोझ

  • हर साल करीब 65 हजार करोड़ रुपये ब्याज चुकाने पर हो रहा खर्च

✍️ प्रहरी संवाददाता मुंबई | महाराष्ट्र के बजट को लेकर विपक्ष ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि राज्य पर कर्ज और कर्ज की गारंटी मिलाकर लगभग 12 लाख करोड़ रुपये का भारी बोझ हो चुका है, जिसका असर सीधे तौर पर राज्य के हर नागरिक पर पड़ रहा है।

विपक्षी नेताओं के अनुसार महाराष्ट्र की आबादी करीब 12.5 करोड़ है। इस हिसाब से देखा जाए तो राज्य के कुल कर्ज का भार औसतन प्रति व्यक्ति लगभग 95 हजार से 1 लाख रुपये तक पहुंचता है। विपक्ष का कहना है कि यह आंकड़ा बताता है कि राज्य की आर्थिक स्थिति पर कर्ज का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि केवल कर्ज की किस्त और ब्याज चुकाने के लिए ही राज्य सरकार को हर साल करीब 65 हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। उनका कहना है कि बजट में बड़े-बड़े विकास के दावे किए जाते हैं, लेकिन आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि राज्य की वास्तविक वित्तीय स्थिति उतनी मजबूत नहीं है जितनी दिखाई जाती है। सपकाल के अनुसार बजट में दिखाए गए आंकड़ों और जमीन पर आर्थिक हालात के बीच बड़ा अंतर है।

इसी मुद्दे पर शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति पहले से ही दबाव में है, इसके बावजूद सरकार लगातार कर्ज लेकर योजनाओं और परियोजनाओं की घोषणाएं कर रही है। ठाकरे ने बजट को “कर्ज लेकर पटाखे फोड़ने वाला बजट” बताते हुए कहा कि जब राज्य पर इतना बड़ा कर्ज हो, तब वित्तीय अनुशासन और प्राथमिकताओं पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि बढ़ते कर्ज का बोझ अंततः राज्य के नागरिकों पर ही पड़ता है। उनका आरोप है कि सरकार बजट में बड़े आर्थिक आंकड़े और दावे पेश कर रही है, लेकिन राज्य की वित्तीय स्थिति और बढ़ते कर्ज के सवालों पर स्पष्ट जवाब नहीं दे रही है।


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