Samachar Prahari
OtherPoliticsTop 10ताज़ा खबरसंपादकीय

राजनीति में दोस्त और दुश्मन नहीं होते…

Share

उद्धव ठाकरे ने दिया इस्तीफा

महाराष्ट्र की राजनीतिक उठापटक से बड़ा सबक

महाराष्ट्र की राजनीति में जारी घमासान के बाद एक सौम्य व शालीन मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। साल 2019 को यानी 23 नवंबर की सुबह भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिला था। बीजेपी ने एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशयारी ने देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई थी। अजित पवार ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली थी, लेकिन 80 घंटे बाद ही दोनों को इस्तीफा देना पड़ा। अब लगभग ढाई साल के बाद अपने ही लोगों के साथ छोड़ देने पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की भी इस्तीफा देना पड़ा है।
तब राजनीति के माहिर खिलाड़ी शरद पवार ने एक तीर से कई शिकार किए थे। सिंचाई घोटाले के दाग को तो धो ही लिया, साथ ही तमाम जांच एजेंसियों के जाल से भी खुद को छुड़ा लिया था।
चाचा-भतीजे की जोड़ी ने गुजरात के महारथियों के साथ ही मी पुन्हा येइन का नारा देनेवाले देवेंद्र की भी खूब फजीहत कराई थी। पवार ने शिवसेना को अपने पाले में करने के बाद कांग्रेस की मदद से महाविकास आघाड़ी की सरकार भी बना ली।
राजनीति में कोई दोस्त या दुश्मन नहीं होता। जब कोई किसी की पीठ में छुरा भोंक जाता है, तो उसका करारा जवाब देना ही पड़ता है। बीजेपी भी मौके की तलाश में थी। बीजेपी की यह तिकड़ी उस अपमान को शायद नहीं भूली। रह-रहकर पवार को सबक सिखाने की योजना पर काम चलता रहा। पवार से सीधा मुकाबला न कर अपनी ही पुरानी सहयोगी यानी शिवसेना को ही सबक सिखाने की चाल चली गई। साम-दाम-दंड और भेद की रणनीति कारगर हुई। शिवसेना के तमाम नेताओं के पीछे जांच एजेंसियां लगा दी गईं। शिवसेना के विधायक मंत्री जाल में आसानी से फंस भी गए।
यह सोचने की बात है कि जिस बालासाहेब ठाकरे ने अपने शिवसैनिकों के बलबूते महाराष्ट्र की राजनीति का समीकरण बदल दिया, राणे-भुजबल और राज ठाकरे के विद्रोह के बाद भी शिवसेना के वजूद पर आंच नहीं आई, वही शिवसेना और शिवसैनिक कैसे बिखर गए। ठाणे के राजनीतिक पटल पर चमकने वाले आनंद दिघे की मौत के बाद अचानक उभरे एकनाथ शिंदे के साथ आज पूरी पार्टी हो ली है। 45 विधायक शिंदे के पीछे हो लिए। उन्हें जरा सा भी ख्याल नहीं आया कि बालासाहेब ठाकरे का बेटा अब मुख्यमंत्री बन गया है। बालासाहेब को दिया वादा भूल गए, जिनके नाम पर चुनाव में जीत कर आए थे यह विधायक।
कहते हैं कि बनिया कभी अपमान और कारोबार में हुए नुकसान को नहीं भूलता…। शिवसेना को तो़ कर उसने पक्के खिलाड़ी शरद पवार को भी जमीन पर ला दिया। उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री बनकर शायद अपने जीवन की सबसे बड़ी भूल की है या फिर वह मन से अपने पुराने सहयोगी को नहीं भुला सके हैं…उसे फिर से गले लगाना चाहते हैं। शायद इसीलिए 45 विधायकों को जाने दिया शिंदे के साथ। राउत पर कितना भरोसा करते।

Share

Related posts

बिहार ने रचा मतदान का इतिहास: पहले चरण में रिकॉर्ड 64.66% वोटिंग, तोड़े सभी पुराने रिकॉर्ड

samacharprahari

भूकंप से जापान के परमाणु ऊर्जा संयंत्र को नुकसान

samacharprahari

पश्चिम रेलवे 21 सितंबर से उपनगरीय खंड पर 500 विशेष लोकल ट्रेनें चलाएगी

samacharprahari

Leave a Comment