16 अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले के बाद प्राधिकरण ने लिखित आदेश में स्वीकारी फर्जीवाड़े की आशंका
✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई | मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) की परियोजना प्रभावितों (पीएपी) को घर वितरित करने वाली व्यवस्था में दलालों और बिचौलियों की गंभीर घुसपैठ का खुलासा हुआ है। महानगर आयुक्त डॉ. संजय मुखर्जी के औचक निरीक्षण के बाद सामाजिक विकास कक्ष के 16 अधिकारियों और कर्मचारियों का अचानक तबादला कर दिया गया था।
इसके ठीक बाद प्राधिकरण ने आधिकारिक लिखित आदेश जारी कर स्वीकार किया है कि कार्यालय में बिचौलियों और एजेंटों के अवैध हस्तक्षेप के कारण वास्तविक पात्र लाभार्थी घरों से वंचित हो सकते हैं और अपात्र या फर्जी लोगों को इसका अनुचित लाभ मिल सकता है।
आदेश के अनुसार, सामाजिक विकास कक्ष के तीसरे और चौथे तल पर दलालों और एजेंटों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रभावितों और उनके परिजनों को भी पहचान पत्र और विजिटर रजिस्टर में दर्ज होने के बाद ही प्रवेश मिलेगा। दोनों तलों पर सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं और बार-बार आने वाले संदिग्ध व्यक्तियों की मासिक रिपोर्ट अतिरिक्त जिलाधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
प्राधिकरण ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि दलालों के संपर्क में पाए जाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर ‘महाराष्ट्र नागरिक सेवा नियमावली’ के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी, जबकि अनधिकृत बिचौलियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत आपराधिक केस दर्ज कराया जाएगा।
इस बीच, मीरा-भायंदर-वसई-विरार पुलिस की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल द्वारा मीठी नदी परियोजना के नाम पर गोरेगांव में घर हड़पने वाले दो संदिग्धों की जांच से मामला और गहरा गया है, जिससे अब तक हुए सभी घर आबंटनों की व्यापक जांच की मांग उठने लगी है।

