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थम नहीं रहा ‘अग्निपथ’ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

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थमी ट्रेनों की रफ्तार, रेलवे ने 369 ट्रेनों को किया रद्द

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण हर साल कोई न कोई विरोध प्रदर्शन और आंदोलन होते ही रहे हैं। आंदोलनों और विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार को कई योजनाओं को वापस पीछे लेना पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद भाजपा सरकार हर साल देश को आग में धकेलने से बाज नहीं आ रही।
ताजा मामला देश की तीनों सेनाओं में भर्ती के लिए लाई गई ‘अग्निपथ योजना’ का है। इस योजना का विरोध शनिवार को भी नहीं थमा। विरोध प्रदर्शन के चलते देश के कई हिस्सों में रेल सेवाएं प्रभावित रहीं।

बिहार में जहां युवाओं ने बंद बुलाया तो वहीं पंजाब के लुधियाना में उपद्रवियों ने स्टेशन पर तोड़फोड़ की। आंदोलन के उग्र व हिंसक होते देख रेलवे ने भी शनिवार को 371 ट्रेनों को रद्द कर दिया। इनमें 210 मेल और एक्सप्रेस और 159 लोकल पैसेंजर ट्रेनें शामिल हैं।

बता दें कि सरकार ने मंगलवार को अग्निपथ योजना का ऐलान करते हुए कहा था कि सेवा में साढ़े 17 से 21 वर्ष की आयु के युवाओं को चार साल के कार्यकाल के लिए शामिल किया जाएगा, जबकि उनमें से 25 प्रतिशत युवाओं को नियमित सेवा के लिए बरकरार रखा जाएगा। योजना के ऐलान के बाद से ही उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा समेत देश के अन्य हिस्सों में उग्र प्रदर्शन शुरू हो गया। देखते-देखते यह प्रदर्शन हिंसक हो गया और युवाओं ने कई ट्रेनों में आग लगी दी।

  • बता दें कि नरेंद्र मोदी सरकार के 8 साल में अब तक कई बार बड़े आंदोलन हो चुके हैं। कुछ आंदोलनों की वजह से भाजपा सरकार को अपने कदम पीछे भी लेने पड़े हैं। कुछ प्रमुख आंदोलन इस तरह हैं।
  1. वर्ष 2015: भूमि अधिग्रहण अध्यादेश का विरोध

  2. वर्ष 2016: फेलोशिप में देरी से रोहित वेमुला मौत के बाद छात्र आंदोलन

  3. वर्ष 2018: एससी-एसटी ऐक्ट को लेकर बवाल

  4. वर्ष 2019-20: सीएए-एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन

  5. वर्ष 2020-21: किसान बिल को लेकर आंदोलन


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