✍🏻 प्रहरी राजनीतिक संवाददाता, नई दिल्ली। बुद्ध पूर्णिमा के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में पाकिस्तान को भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं का स्पष्ट और निर्णायक संदेश दिया। यह पहली बार है जब भारत ने कूटनीतिक, सैन्य और जल नीति को एक ही मंच से जोड़ते हुए पड़ोसी देश को तीन स्पष्ट शर्तों के दायरे में ला खड़ा किया है, आतंकवाद और वार्ता साथ नहीं चल सकते, आतंकवाद और व्यापार एक साथ नहीं हो सकते और खून तथा पानी एक साथ नहीं बह सकते।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की सेनाएं हर स्थिति के लिए तैयार हैं। “ऑपरेशन सिंदूर” का हवाला देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अब पारंपरिक प्रतिक्रियाओं की नीति नहीं, बल्कि निर्णायक पहल की रणनीति अपना चुका है। यह ऑपरेशन भारत की बदलती सैन्य सोच का परिचायक है, जिसमें प्रतिरोध नहीं, प्रतिकार प्राथमिकता है।
पीएम मोदी ने न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग के पुराने पाकिस्तानी हथकंडों को खारिज करते हुए कहा कि अब भारत उस ढाल के पीछे पनपते आतंकी नेटवर्क को निष्क्रिय करने से नहीं हिचकेगा। उन्होंने साफ किया कि आतंकी ढांचे को समर्थन देने वाली सरकार और आतंकी आकाओं में अब कोई अंतर नहीं देखा जाएगा।
सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब अपने जल संसाधनों को आतंक से जोड़कर देखेगा। सिंधु जल समझौते को लेकर भारत ने अपने कदम रोक जरूर दिए हैं, लेकिन इसका पुनरावलोकन अब सिर्फ राष्ट्रीय हित के आलोक में होगा, न कि पुराने कूटनीतिक संतुलन के आधार पर।
प्रधानमंत्री ने दो टूक कहा कि पाकिस्तान से भविष्य में कोई भी बातचीत तभी होगी जब विषय आतंकवाद या पीओके होगा। कश्मीर को लेकर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की आशा को भी उन्होंने खारिज कर दिया।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आज का भारत सिर्फ शांति की कामना नहीं करता, बल्कि शक्ति से उस शांति की रक्षा करना जानता है। उन्होंने कहा, “शांति का मार्ग शक्ति से होकर गुजरता है।”
