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बाजार में बिकवाली का दबाव गहराया, 2026 में निफ्टी करीब 13% नीचे

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  • सितंबर में 5.8% से ज्यादा गिरावट

  • विदेशी निवेशकों ने सालभर में भारतीय शेयरों से $26.75 अरब निकाले

  • 29 सितंबर को ही ₹9,980 करोड़ की बिकवाली

✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई | भारतीय शेयर बाजार के लिए 2026 अब तक दबाव का साल साबित हुआ है। साल की शुरुआत से निफ्टी-50 करीब 13 फीसदी नीचे आ चुका है। 31 दिसंबर 2025 को 26,129.60 पर बंद हुआ निफ्टी 29 सितंबर 2026 को 22,716.20 पर आ गया। यानी करीब 3,413 अंक की गिरावट। 30 सितंबर की शुरुआती कारोबार में निफ्टी 22,762 के आसपास रहा, जिससे सालाना गिरावट करीब 12.9 फीसदी बनी रही।

30 सितंबर की सुबह तक उपलब्ध बाजार आंकड़ों के मुताबिक निफ्टी करीब 5.8 फीसदी नीचे था और यह मार्च के बाद सबसे कमजोर मासिक प्रदर्शन की ओर बढ़ रहा था। सितंबर सीरीज में निफ्टी की गिरावट 6.50 फीसदी रही।

बाजार पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी पूंजी की लगातार निकासी का भी है। 29 सितंबर को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयरों से 9,980 करोड़ रुपए निकाले। यह करीब छह महीने में एक दिन की सबसे बड़ी निकासी रही। ताजा आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में विदेशी निवेशकों की कुल बिकवाली करीब 2.7 अरब डॉलर और 2026 में अब तक उनकी शुद्ध निकासी 26.75 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है।

घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी विदेशी बिकवाली की पूरी भरपाई नहीं कर पा रही है। 29 सितंबर को डीआईआई यानी घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 6,952.71 करोड़ रुपए की खरीदारी की, लेकिन एफपीआई यानी विदेशी संस्थागत निवेशकों की 9,980.22 करोड़ रुपए की बिकवाली के मुकाबले बाजार पर दबाव कायम रहा।

बाजार के कैपिटलाइजेशन पर भी इसका असर दिखा है। 28 सितंबर को BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण एक ही दिन में 7.52 लाख करोड़ रुपए घटकर 474.36 लाख करोड़ रुपए रह गया था। 29 सितंबर की गिरावट के बाद यह 472.50 लाख करोड़ रुपए पर आ गया और उस दिन निवेशकों की संपत्ति में करीब 1.86 लाख करोड़ रुपए की कमी दर्ज हुई।

हालांकि यहां एक अहम अंतर है। 31 दिसंबर 2025 को बीएसई-लिस्टेड कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 475.79 लाख करोड़ रुपए था। 29 सितंबर के 472.50 लाख करोड़ रुपए से तुलना करें तो कुल मार्केट कैप में साल की शुरुआत से करीब 3.29 लाख करोड़ रुपए, यानी लगभग 0.7 फीसदी की कमी दिखती है। इसे सीधे-सीधे निवेशकों की कुल संपत्ति में सालाना नुकसान नहीं माना जा सकता, क्योंकि नए IPO, नई शेयर पूंजी और लिस्टिंग जैसी गतिविधियां भी कुल बाजार पूंजीकरण को बदलती हैं।

बाजार पर तीसरा बड़ा दबाव कच्चे तेल और रुपये का है। सितंबर के आखिरी दिनों में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर से ऊपर बना रहा, जबकि रुपया डॉलर के मुकाबले 96 के आसपास पहुंच गया। अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.27 फीसदी से ऊपर जाने से भी विदेशी निवेश के लिए भारत जैसे उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ा।

 


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