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सरकारी धन के ‘गबन’ का पर्दाफाश!

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  • ‘लाडकी बहिण योजना’ के दुरुपयोग पर महाराष्ट्र विधानसभा में हंगामा
  • 8,000 सरकारी कर्मचारियों ने लिया अवैध लाभ: मंत्री तटकरे
  • 14,000 महिलाओं ने पुरुषों के खाते किए इस्तेमाल

✍🏻 डिजिटल न्यूज़ डेस्क, नागपुर | महाराष्ट्र विधानसभा में बुधवार को ‘मुख्यमंत्री माजी लाडकी बहीण योजना’ के कथित दुरुपयोग को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। सरकार ने स्वीकार किया कि विभिन्न विभागों के लगभग 8,000 सरकारी कर्मचारियों ने पात्रता न होने के बावजूद इस योजना का लाभ लिया है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने सदन को बताया कि इन कर्मचारियों द्वारा लाभ लेना ‘पूरी तरह से अवैध है’ और सरकार ने ऐसे लाभार्थियों से राशि की वसूली शुरू कर दी है। उन्होंने यह भी बताया कि करीब 12,000 से 14,000 महिलाओं ने अपने नाम पर बैंक खाता न होने के कारण अपने पति या पुरुष परिजनों के खातों का इस्तेमाल कर मासिक ₹1,500 की सहायता राशि प्राप्त की। मंत्री ने कहा कि कई महिलाएं अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ ले चुकी थीं, जिसके कारण वे इस योजना के लिए अयोग्य थीं।

मंत्री तटकरे ने आश्वस्त किया कि इन सभी मामलों की अगले दो महीनों में विस्तृत जांच की जाएगी। उन्होंने योजना शुरू होने के समय अन्य योजनाओं के लाभार्थियों का समेकित डेटा उपलब्ध न होने की बात कही, लेकिन अब आईटी विभाग की मदद से डेटा मिलान शुरू कर दिया गया है।

विपक्ष ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप

चर्चा की शुरुआत शिवसेना (उबाठा) विधायक सुनिल प्रभु के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव से हुई, जिन्होंने योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। प्रभु ने दावा किया कि 12,431 पुरुषों ने धोखाधड़ी से पंजीकरण कराया, जिससे राज्य को ₹164 करोड़ का नुकसान हुआ।

कांग्रेस विधायक नाना पटोले ने आरोप लगाया कि आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी सेविकाओं और ग्राम सेवकों को लक्ष्य देकर पंजीकरण करवाए गए, जिससे फर्जी आवेदनों की संख्या बढ़ी। उन्होंने सरकार से “सार्वजनिक धन के इस कुप्रबंधन का जवाब” देने की मांग की।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने सवाल उठाया कि सरकार निधि वितरण कम करने के लिए योजना में बाद में ई-केवाईसी जैसी शर्तें लागू कर रही है। मंत्री तटकरे ने जवाब दिया कि कई महिलाओं के पास बैंक खाता न होने के कारण पुरुष परिजनों के खाते इस्तेमाल किए जा रहे थे, इसलिए सत्यापन के लिए ई-केवाईसी आवश्यक था।


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