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ED की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल: 6,444 मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में सिर्फ 53 में ही दोषसिद्धि, क्यों फिसला सरकारी शिकंजा?

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ईडी ने 11 साल में लॉन्ड्रिंग केस में 1.70 लाख करोड़ की संपत्ति कुर्क की

✍🏻 डिजिटल न्यूज डेस्क, नई दिल्ली | संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने 11 साल के कामकाज का लेखा-जोखा पेश किया है। केंद्र सरकार ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अप्रैल 2014 से नवंबर 2025 तक कुल 6,444 मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित मामले दर्ज किए हैं। इस अवधि में एजेंसी ने 11,106 छापे मारे, 2,416 आरोप पत्र दायर किए और 16,404 व्यक्तियों व संस्थाओं को आरोपी बनाया। सरकार ने एजेंसी की ताबड़तोड़ कार्रवाई की तस्वीर तो पेश की, लेकिन दर्ज किए गए मामलों की तुलना में दोषसिद्धि की बेहद कम संख्या को लेकर सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हजारों मामले दर्ज, न्याय फिर भी कम:

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में जानकारी दी कि अप्रैल 2014 से नवंबर 2025 तक ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कुल 6,444 मामले दर्ज किए। इस दौरान एजेंसी ने 11,106 बार छापे मारे और 16,404 व्यक्तियों व संस्थाओं को आरोपी बनाया। हालांकि, इन हजारों दर्ज मामलों के मुकाबले, विशेष पीएमएलए अदालतों ने अब तक केवल 56 मामलों में ही अपना फैसला सुनाया है, जिनमें से 53 मामलों में 121 लोगों को दोषी ठहराया गया है।
यह विरोधाभास दर्शाता है कि 6,444 मामलों की विशाल संख्या के बावजूद, दोषियों को सज़ा दिलाने का सरकारी औसत चिंताजनक रूप से कम है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या ईडी द्वारा दर्ज किए गए ज्यादातर मामले कानूनी कसौटी पर अपनी अंतिम परीक्षा पास नहीं कर पाते हैं।

कुर्की और छापे में रिकॉर्ड वृद्धि:

हालांकि सरकार का दावा है कि दोषसिद्धि की दर कम होने के बावजूद, ईडी ने संपत्ति कुर्क करने में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में कुल 1.70 लाख करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं। मंत्री ने बताया कि अकेले अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच रिकॉर्ड 30,000 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गईं, जबकि चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले पांच महीनों में ही यह आंकड़ा 15,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पीएमएलए लागू होने (2005) से अब तक 8,100 मामलों में यह कुल कुर्की हुई है।

उच्च दोषसिद्धि दर का आधार:

मंत्री ने सदन को सूचित किया कि जिन 56 मामलों में फैसला आया है, उनमें दोषसिद्धि दर 94.64% रही है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि यह उच्च दर केवल उन मुट्ठी भर मामलों पर आधारित है जिनका ट्रायल पूरा हो चुका है, न कि कुल दर्ज किए गए 6,444 मामलों पर। इस अवधि में ईडी ने 2,416 आरोप पत्र भी दायर किए हैं।

आयकर विभाग की कार्रवाई और क्लोजर रिपोर्ट:

सरकार ने आयकर विभाग की कार्रवाई के आंकड़े भी प्रस्तुत किए, जिसमें 2014 से अब तक विभाग ने 13,877 मामले दर्ज किए और 9,657 बार छापेमारी की, जिसमें 522 लोगों को दोषी ठहराया गया। ईडी ने अगस्त 2019 से अब तक 93 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, जिनमें मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध नहीं पाया गया। वहीं, पीएमएलए लागू होने (2005) से जुलाई 2019 तक, ऐसे 1,185 मामलों को बंद किया गया था।

 


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