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महाराष्ट्र एमएलसी चुनाव में भी सत्ता पक्ष की पराजय

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बीजेपी के 5 उम्मीदवार जीते, महाविकास अघाड़ी को लगा करारा झटका, कांग्रेस उम्मीदवार हंडोरे पराजित

प्रहरी संवाददाता, मुंबई। महाराष्ट्र में राजनीतिक दांवपेंच में भाजपा कांग्रेस,एनसीपी और शिवसेना अघाड़ी पर एक बार फिर से हावी रही है। एमएलसी चुनाव में भाजपा के पांच उम्मीदवारों को जीत मिली है, जबकि शिवसेना- एनसीपी के दो-दो उम्मीदवारों और कांग्रेस के एक उम्मीदवार ने जीत हासिल की है।

महाराष्ट्र में विधान परिषद की दस सीटों के लिए चुनाव सोमवार को संपन्न हुए। भाजपा के पांच विजेता उम्मीदवार प्रवीण दरेकर, राम शिंदे, श्रीकांत भारतीय, उमा खापरे और प्रसाद लाड हैं।

वहीं, एनसीपी के एकनाथ खड़से और रामराजे नाईक निंबालकर ने जीत हासिल की है। शिवसेना के उम्मीदवार अमश्या पडवी और सचिन अहीर भी जीते हैं। कांग्रेस के भाई जगताप ने जीत दर्ज की, जबकि चंद्रकांत हंडोरे हार गए।

कुल 288 सदस्यों में से 285 ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। इससे पहले रिटर्निंग ऑफिसर ने एनसीपी और भाजपा के एक-एक वोट को अवैध करार दे दिया था। यह निर्णय दोनों दलों के नेताओं द्वारा ऑब्जेक्शन करने के बाद किया गया था। वहीं, दो एनसीपी विधायकों पूर्व मंत्री अनिल देशमुख और नवाब मलिक को वोट डालने की इजाजत नहीं मिली थी। यह दोनों मनी लांड्रिंग केस में न्यायिक हिरासत में हैं।

बता दें कि विधानपरिषद की कुल दस सीटों के लिए कुल 11 उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें से पांच उम्मीदवार भाजपा के और छह महाविकास अघाड़ी गठबंधन के थे, लेकिन पर्याप्त संख्याबल न होने के बावजूद भाजपा की यह जीत अप्रत्याशित है। महाविकास अघाड़ी गठबंधन के लिए यह करारी हार मानी जा रही है।

चुनाव से पहले ही महाविकास अघाड़ी गठबंधन का समीकरण बिगड़ा हुआ था। इसकी बुनियाद राज्यसभा चुनाव में मिली हार के बाद पड़ चुकी थी। शिवसेना के उम्मीदवार को मुंह की खानी पड़ी थी। अब विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को वोट ट्रांसफर नहीं हो सके।

बता दें कि शिवसेना को आशंका थी कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में उसे अपना वोट ट्रांसफर नहीं किया था। विधान परिषद चुनाव में शिवसेना ने साफ कर दिया था कि सभी दल अपने-अपने उम्मीदवारों के लिए खुद से वोट जुटाएंगे। एमवीए सहयोगी दलों में एक दूसरे को अपने सरप्लस वोट ट्रांसफर करने पर कोई सहमति नहीं बन सकी।


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