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कागजी कंपनियों और बेनामी नेटवर्क पर हंटर: 10 साल में 3.09 लाख फर्जी डायरेक्टरों के नंबर ब्लॉक, 1.12 लाख शेल इकाइयां जांच के घेरे में

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  • 2017 से 2026 के बीच 9 लाख से अधिक कंपनियों और 1.37 लाख एमएसएमई का वजूद खत्म

  • 8.30 लाख डिफंक्ट फर्में और 15 हजार बिल्डर SPVs भी नपे

✍️ प्रहरी विशेष संवाददाता, मुंबई/नई दिल्ली | देश की अर्थव्यवस्था को खोखला करने वाले वित्तीय फर्जीवाड़े, हवाला नेटवर्क और कागजी कंपनियों पर पिछले 10 साल में केंद्र सरकार और वित्तीय जांच एजेंसियों ने कड़ी कार्रवाई की है। कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड और प्रवर्तन निदेशालय की आधिकारिक जांच रिपोर्टों के मुताबिक, बोगस कंपनियों की आड़ में 3 लाख 9 हजार 614 बेनामी और कागजी डायरेक्टरों की पहचान कर उनके डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर (डीआईएन) ब्लॉक कर दिए गए हैं।

जांच में सामने आया कि चपरासी, रसोइये, मजदूर और ड्राइवरों के पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर एक-एक व्यक्ति के नाम पर 20 से लेकर 100 तक फर्जी कंपनियां चलाई जा रही थीं, जिनमें 55 हजार से अधिक ऐसे डमी बोर्ड मेंबर थे, जिनका काम केवल फाइलों पर दस्तखत करना था। इस सफाई अभियान में हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग के अड्डों को ध्वस्त करते हुए दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और कोलकाता में सक्रिय 2,200 से अधिक पेशेवर एंट्री ऑपरेटर्स के सिंडिकेट को तोड़ा गया।

जांच एजेंसियों ने 1.12 लाख से अधिक संदिग्ध कंपनियों के जटिल नेटवर्क की पड़ताल की, जिसमें बड़े सिंडिकेट्स द्वारा बोगस शेयर प्रीमियम और फर्जी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) के जरिए 1.33 लाख करोड़ रुपये से अधिक की काली कमाई और टैक्स चोरी के खेल का पर्दाफाश हुआ।

दूसरी तरफ, घाटे और मंदी के चलते बंद हुए असली कारोबारियों के मोर्चे पर कुल 8.30 लाख डिफंक्ट कंपनियों और एमएसएमई इकाइयों पर भी ताला लगा, जिसमें जुलाई 2020 से अब तक उद्यम पोर्टल पर दर्ज 1 लाख 37 हजार पंजीकृत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग शामिल हैं। इनमें 98.2 फीसदी हिस्सेदारी उन अति-लघु और लघु उद्यमियों की रही, जिन्होंने कारोबार ठप होने के बाद भारी कंप्लायंस खर्च से बचने के लिए रिटर्न भरना बंद कर दिया था।

रियल एस्टेट सेक्टर में भी फर्जीवाड़े और अधूरी परियोजनाओं पर कड़ा चाबुक चला है, जिसके तहत रेरा (RERA) के एस्क्रो अकाउंट नियमों और फंड डायवर्जन पर रोक के चलते प्रोजेक्ट्स के लिए बनी 15 हजार से अधिक स्पेशल पर्पज व्हीकल्स (एसपीवी) सहायक कंपनियां डिफंक्ट होकर बंद हो गईं। इसके अलावा घर खरीदारों को धोखा देने और बैंकों के कर्ज में डिफाल्ट करने वाली 2,300 से अधिक बड़ी और मध्यम रियल एस्टेट कंपनियां राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में दिवालिया प्रक्रिया के तहत फंसी हैं। वित्तीय जांच एजेंसियों और मंत्रालय का यह डेटा-संचालित अभियान साफ संदेश देता है कि बोगस बिलिंग और बेनामी संपत्तियों के लिए कागजी कंपनियों का इस्तेमाल करने वाले किसी भी सिंडिकेट को अब बख्शा नहीं जाएगा।


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