Category : संपादकीय
कृष्ण होते तो क्या कहते? 100 रुपया तिजोरी से, क्या पेट भरेगी गैया मां…,
“सरकार के 100 रुपये के गौसेवा अनुदान पर व्यंग्य! क्या वास्तव में यह गौ माता के लिए वरदान है या सिर्फ एक दिखावा? पढ़ें, एक...
सांसदों की ‘कुर्सी’ पर बैठते ही दौलत का ‘टर्बो मोड’, जनता अब भी ‘स्लो मोशन’ में!
करोड़पति सांसदों की संख्या बढ़कर साल 2024 में 504 पहुंच गई ✍🏻 प्रहरी संवाददाता, नई दिल्ली। राजनीति को ‘जनसेवा’ कहा जाता है, लेकिन आंकड़े बताते...
जातिगत जनगणना: क्या राजनीति से आगे बढ़कर सामाजिक न्याय मिलेगा?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातिगत जनगणना एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव लगातार इसकी...
‘वर्षा’ बंगला: सत्ता का प्रतीक या विवादों का अड्डा?
सबसे बड़ा रियल एस्टेट ड्रामा – आर आर यादव महाराष्ट्र की राजनीति में ‘वर्षा’ बंगला महज एक सरकारी निवास नहीं, बल्कि सत्ता का प्रतीक बन...
