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चार साल में बचाए 5 हजार करोड़, फिर भी रेलवे को हो रहा है घाटा

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सीनियर सिटीजंस को मिलने वाली टिकट छूट आधिकारिक रूप से खत्म

मुंबई। सीनियर सिटीजंस को किराए में छूट देने से सरकार के खजाने पर भारी बोझ पड़ता है। इसलिए इसे बहाल करने की कोई योजना नहीं है। यह कहना है भाजपा की केंद्र सरकार के रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का। उन्होंने बुधवार को साफ कर दिया कि अब बुजुर्ग नागरिकों को कोई रियायत नहीं दी जाएगी।
सरकार ने पिछले चार साल में पांच हजार करोड़ रुपये बतौर टिकट छूट को रद्द करते हुए बचाए हैं, लेकिन इसके बावजूद रेल घाटे में चल रहा है। रेल मंत्री वैष्णव ने कहा कि सीनियर सिटीजंस और खिलाड़ियों को मिलने वाली छूट को बहाल करना ठीक नहीं है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि वर्ष 2017-18 में सीनियर सिटीजंस को टिकट पर छूट देने से रेलवे पर 1491 करोड़ रुपये का बोझ पड़ा। वर्ष 2018-19 में यह राशि 1636 करोड़ रुपये और वर्ष 2019-20 में 1667 करोड़ रुपये रही।

वर्ष 2019-20 में यह रकम 6.18 करोड़, वर्ष 2020-21 में 1.90 करोड़ और वर्ष 2021-22 में 5.55 करोड़ सीनियर सिटीजंस ने रेलवे में रिजर्व्ड क्लासेज में यात्रा की है। कोरोना महामारी के कारण 2020-21 और 2021-22 में रेलवे में सफर करने वाले सीनियर सिटीजंस की संख्या में कमी आई।

मजे की बात यह है कि भाजपा सरकार ने एक तरफ सब्सिडी और विभिन्न रियायतों के नाम पर सरकारी खजाने पर हजारों करोड़ रुपये का बोझा पड़ने की बात कहते हुए सभी नागरिक सुविधाएं बंद कर दी हैं, लेकिन दूसरी ओर साल 2018 में फाइनांस एक्ट 2018 के जरिए कानून में संशोधन करते हुए सांसदों के वेतन, दैनिक भत्ते और पेंशन में हर पांच साल में बढ़ोतरी करने का ऐलान भी कर दिया।

लाखों रुपये की सैलरी पानेवाले नेता और मंत्री टैक्स के पैसे से फ्री में सुविधाओं का लाभ तो उठा रहे हैं, खुद का वेतन बढ़ाने की मांग कर सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ा रहे हैं। लेकिन सीनियर सिटीजंस और खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाएं और छूट खत्म करने में देर नहीं की।


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