Samachar Prahari
OtherPoliticsTop 10एजुकेशनताज़ा खबरबिज़नेसभारतराज्य

LIC IPO: सरकार ने बेची हिस्सेदारी, निवेशकों ने झेला झटका

Share

  • दलाल स्ट्रीट पर अटकी खुदरा निवेशकों की सांसें

  • सरकार ने पूरे किए राजकोषीय लक्ष्य

  • चार साल बाद भी मूल भाव को तरस रहे पॉलिसीधारक

 

✍🏻प्रहरी संवाददाता, मुंबई | देश के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के नाम पर मई 2022 में लाखों छोटे पॉलिसीधारकों और खुदरा निवेशकों को बेहतरीन निवेश का सपना दिखाने वाली भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) चार साल बाद भी दलाल स्ट्रीट पर अपनी साख साबित करने के लिए जूझ रही है। शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को सुबह 11:30 बजे बीएसई पर एलआईसी का शेयर 406.35 रुपये पर रेंगता दिखा, जिसका दिन का दायरा 403.05 रुपये से 407.20 रुपये के बीच सिमट कर रह गया। पिछले सत्र में 406 रुपये पर बंद हुए इस शेयर का कुल बाजार पूंजीकरण इस समय लगभग 5.14 लाख करोड़ रुपये आंका गया। स्क्रीन पर दिख रहा यह स्तर उस कड़वी हकीकत को बेनकाब करता है, जहां सरकार ने तो अपना खजाना भरने के लिए प्रीमियम वैल्यूएशन पर शेयर बेच दिए, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी आम निवेशक अपने घाटे और सरकार के भारी-भरकम वादों के बीच खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहा है।

मई 2022 में सरकार ने 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी का 100 प्रतिशत ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) लाकर सरकारी खाते में 20,557 करोड़ रुपये तो सुरक्षित कर लिए, लेकिन कंपनी की झोली में एक भी नया पैसा नहीं आया। इश्यू का आकार 5 फीसदी से घटाने के बावजूद सरकार ने कीमत की ऊपरी सीमा 949 रुपये पर अड़ाए रखी। 17 मई 2022 को जब यह शेयर बीएसई पर 8.62 फीसदी के बट्टे के साथ 867.20 रुपये पर लिस्ट हुआ, तभी सरकारी दावों की हवा निकल गई थी।

इसके बाद वैश्विक मंदी और महंगाई का बहाना भले बनाया गया, लेकिन असलियत यह थी कि एंकर निवेशकों का लॉक-इन खत्म होते ही बड़े फंडों ने बिकवाली कर अपना पल्ला झाड़ लिया। निजी कंपनियों के मुकाबले कमजोर न्यू बिजनेस मार्जिन और जनवरी 2023 में अडानी समूह में एलआईसी के निवेश को लेकर उठे विवादों ने छोटे निवेशकों के भरोसे को तोड़ दिया। नतीजा यह हुआ कि 29 मार्च 2023 को शेयर 530.05 रुपये के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया। आईपीओ भाव से सीधे 44 प्रतिशत की इस बर्बादी ने निवेशकों की 2.65 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति स्वाहा कर दी और मार्केट कैप घटकर 3.35 लाख करोड़ रुपये रह गया था।

निचले स्तरों पर चौतरफा फजीहत के बाद जब पीएसयू शेयरों में तेजी लौटी, तो 1 अगस्त 2024 को एलआईसी 1,222 रुपये के ऑल-टाइम हाई पर जरूर पहुंची, लेकिन खुदरा निवेशकों को राहत मिलने से पहले ही गणित फिर बदल दिया गया। मई 2026 में कंपनी ने 1:1 बोनस शेयर का दांव चला। 27 मई 2026 को 830 रुपये पर बंद हुए शेयर को 29 मई की एक्स-बोनस तारीख पर तकनीकी रूप से आधा कर 415 रुपये से 417 रुपये के दायरे में खोल दिया गया। कागजों पर शेयर दोगुने होकर 1,265 करोड़ तो हो गए, लेकिन बाजार में फ्लोटिंग शेयरों की अचानक बाढ़ आते ही खुदरा स्तर पर पैनिक और बिकवाली का नया दौर शुरू हो गया, जिसने शेयर को आज फिर 406 रुपये के निचले दायरे में धकेल दिया है।

इस वित्तीय अनिश्चितता के बीच संस्थागत नेतृत्व में भी खलबली मची। 15 जून 2026 को वित्त मंत्रालय ने अचानक एलआईसी के प्रबंध निदेशक दिनेश पंत के इस्तीफे की घोषणा की। 1 जून 2025 को एमडी बने पंत पर कंपनी के वैल्यूएशन, रिस्क और एक्चुअरी रणनीति की सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी. उनके हटते ही बोर्ड और विनियामक संतुलन को लेकर बाजार में चिंताएं और गहरी हो गईं।

50 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के एसेट और घरेलू शेयर बाजार में 15 लाख करोड़ रुपये की पूंजी लगाने वाली इस महाकाय संस्था की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि सरकार के पास अब भी 96.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बची हुई है। सेबी के 25 प्रतिशत पब्लिक शेयरहोल्डिंग के कड़े नियमों को पूरा करने के लिए सरकार को बाजार में नया ओएफएस लाकर भारी सप्लाई झोंकनी पड़ सकती है। सरकार के अगले विनिवेश का यही डर और निजी बीमा कंपनियों के सामने लगातार घटता मार्केट शेयर आज भी एलआईसी के शेयर को सांस नहीं लेने दे रहा है, जबकि अपनी गाढ़ी कमाई लगाने वाले छोटे निवेशक चार साल बाद भी सिर्फ अपने मूलधन की वापसी का इंतजार कर रहे हैं।


Share

Related posts

रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक को बड़ा झटका, NCLT ने दिवालिया घोषित किया

Prem Chand

अनुच्छेद 370 हटाने से आतंकवाद नहीं रुका: कांग्रेस

Vinay

पांच साल में ‘माननीयों’ की रेल यात्रा पर 62 करोड़ रुपये का खर्च

samacharprahari

Leave a Comment