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इंस्टेंट लोन ऐप्स की जबरन वसूली, 200 फीसदी ब्याज वसूला : सर्वे

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मुंबई। लॉकडाउन और कोरोना से जहां लोगों के रोजगारत पर असर हुआ और आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ा तो वहीं डिजिटल साहूकारों ने पिछले दो साल में कर्ज लेनेवालों से करीब 200 फीसदी ब्याज वसूला है।

लोकलसर्किल्स के एक सर्वे के अनुसार, लगभग 14 फीसदी भारतीय नागरिकों ने इंस्टेंट लोन ऐप्स के जरिए कर्ज लिया है। इनमें से करीब 58 फीसदी से लोगों से 25-50 फीसदी और कहीं-कहीं 200 फीसदी का सालाना ब्याज वसूला गया है।

जबरन वसूली की घटनाएं बढ़ीं
सर्वे में शामिल लगभग 54 फीसदी लोगों का कहना था कि भुगतान के दौरान उनसे जबरन वसूली की गई। उनके कर्ज व ब्याज संबंधी आंकड़ों से भी छेड़छाड़ हुई।

सर्वे में 47 फीसदी टायर 1 शहरों और 35 फीसदी टायर 2 शहरों के निवासी हैं। 18 फीसदी टायर 3 और 4 एवं ग्रामीण इलाकों से भी हैं।

200 फीसदी तक वसूला गया ब्याज
सर्वे में शामिल 26 फीसदी कर्जदारों से 10-25 फीसदी ब्याज लिया गया, जबकि 16 फीसदी कर्जदारों से 25-50 फीसदी तक ब्याज लिया गया। लगभग 26 फीसदी लोगों ने कहा कि उनसे 100-200 फीसदी की दर से ब्याज लिया गया। 16 फीसदी लोगों ने कहा कि उनसे 200 फीसदी से भी अधिक ब्याज दर वसूला गया है।
कुल 58 फीसदी लोगों ने माना कि उनसे सालाना 25 फीसदी से अधिक का ब्याज लिया गया है। सर्वे में शामिल 14 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्होंने या उनके परिवार में से किसी सदस्य ने इंस्टेंट लोन ऐप के जरिए कर्ज लिया और चंगुल में फंस गए।

अधिकांश लोन ऐप अवैध
आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने लोन ऐप्स की बढ़ती मनमानी को देखते हुए डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करने के लिए नियम बनाने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि अधिकांश अवैध और अनधिकृत लोन ऐप्स संचालित हो रहे हैं।


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