पहले फेज में 10 फरवरी को वोटिंग होगी, आखिरी चरण का मतदान 7 मार्च को खत्म होगा, 10 मार्च को आएगा परिणाम
प्रहरी संवाददाता, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चुनाव की रणभेरी बज गई है। शनिवार को भारतीय चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर में चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया। इस बार युवा मतदाताओं पर सरकार बनाने का दारोमदार है। सूबे में बेरोजगारी, हेल्थ व कानून व्यवस्था के साथ ही महिला अपराध चुनावी मुद्दा बनेंगे।
कोविड प्रतिबंधों के बीच होगा चुनाव
बता दें कि उत्तर प्रदेश में कोविड प्रतिबंधों के साथ सात चरणों में चुनाव कराए जाएंगे। यूपी में 10 फरवरी को पहले चरण का मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण का मतदान 14 फऱवरी, तीसरे चरण का मतदान 20 फरवरी को होगा।
चौथे चरण का मतदान 23 फरवरी, पांचवे चरण का मतदान 27 फरवरी, छठे चरण का मतदान 3 मार्च और सातवें चरण का मतदान 7 मार्च का होगा। 10 मार्च को पांचों राज्यों की मतगणना होगी। पिछला चुनाव भी सात चरण में हुआ था और 61.04 फीसदी वोटिंग हुई थी।
27.76 फीसदी मतदाता पहली बार करेंगे वोट
उत्तर प्रदेश के चुनाव में इस बार 15 करोड़ से ज्यादा मतदाता हिस्सा लेंगे। पिछले चुनाव में 14 करोड़ 71 लाख 298 मतदाताओं ने वोट किया था। इस साल वोटर लिस्ट में 52 लाख 80 हजार 882 मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं, जबकि 21 लाख वोटरों का नाम लिस्ट से हटाया गया है। इस बार यूपी चुनाव में 27.76 फीसदी मतदाता पहली बार मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।
नए वोटर तय करेंगे सियासत का रुख
पहली बार चुनाव में हिस्सा लेने वाले नए वोटर ही उत्तर प्रदेश की सियासत का रुख तय करेंगे।18-19 साल के इन युवा वोटरों के अलावा 30 साल से कम उम्र के 26 फीसदी मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट में है। ऐसे में युवा वोटरों का बड़ा हिस्सा जिस पाले में जाएगा, उसका चुनावी मैदान जीतना तय है। इस बार बेरोजगारी का मुद्दा सबसे ज्यादा अहम माना जा रहा है।
आदर्श आचार संहिता लागू
यूपी आबादी के हिसाब से बड़ा सूबा है और सियासी तौर पर भी महत्वपूर्ण राज्य है। आदर्श आचार संहिता के लगते ही प्रदेश के सभी राजनीतिक दलों की किस्मत का फैसला सीधे जनता के हाथों में आ गया है।
2017 में किसको कितनी सीट
भाजपा को पिछले चुनाव 2017 में 312 सीटें मिली थीं, जबकि, सपा को 47, बसपा को 19, अपना दल को नौ, कांग्रेस को सात, एसबीएसपी को चार और निर्दलीय को तीन सीटें हासिल हुई थीं।
