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15 करोड़ बच्चे एवं युवा देश की औपचारिक शिक्षा व्यवस्था से बाहर

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50 करोड़ की युवा आबादी में से 35 करोड़ साक्षरता की परिभाषा के नीचे है

मुंबई। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने गुरुवार को कहा कि लगभग 15 करोड़ बच्चे एवं युवा देश की औपचारिक शिक्षा व्यवस्था से बाहर हैं। इसके अलावा करीब 25 करोड़ आबादी साक्षरता की बुनियादी परिभाषा के नीचे है। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में देश का हर गांव हाई-स्पीड इंटरनेट से जुड़ जाएगा और बड़े पैमाने पर किये जा रहे डिजिटलीकरण के प्रयासों से नई शिक्षा, कौशल और उद्यमशील व्यवस्था का निर्माण कर रहे हैं।

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित वार्षिक सम्मेलन के दौरान ‘रोजगार सृजन एवं उद्यमिता’ विषय पर प्रधान ने यह बात कही। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि अगर हम सरकारी, निजी एवं धर्मार्थ स्कूलों, आंगनवाड़ी, उच्च शिक्षण संस्थानों एवं कौशल से जुड़ी पूरी व्यवस्था में 3 से 22 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों एवं युवाओं की संख्या पर नजर डालें, तब यह संख्या 35 करोड़ होती है। देश में इस आयु वर्ग की आबादी 50 करोड़ है।

उन्होंने कहा कि इसका अर्थ यह हुआ कि कम से कम 15 करोड़ बच्चे एवं युवा देश की औपचारिक शिक्षा व्यवस्था से बाहर हैं। आजादी के बाद कराई गई जनगणना में यह पाया गया कि आबादी का 19 प्रतिशत हिस्सा साक्षर है। आजादी के 75 वर्ष के आंकड़ों के अनुसार, देश में साक्षरता दर 80 प्रतिशत पहुंच गई है।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति केवल एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि अगले 25 वर्षो में उन लक्ष्यों को हासिल करने का खाका है, जब हम आबादी के 100 वर्ष पूरे करेंगे। उन्होंने कहा कि पहली बार सरकार ने शिक्षा के साथ कौशल को जोड़ा है। यह आजीविका की दिशा में नई पहल को रेखांकित करता है।


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