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केयर्न ने बढ़ाई सरकार की फजीहत

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सरकारी कंपनियां केयर्न के ‘निशाने’ पर आईं

मुंबई। भारत सरकार से अपने बकाया की वसूली के लिए ब्रिटेन की केयर्न एनर्जी पीएलसी की निगाह अब एयर इंडिया के बाद अमेरिका से लेकर सिंगापुर तक सार्वजनिक क्षेत्र की अन्य कंपनियों तथा बैकों की संपत्तियों पर गड़ी है। पिछली तारीख से कर मामले में मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने केयर्न के पक्ष में फैसला दिया है, जिसके बाद उसे भारत सरकार से वसूली करनी है। कंपनी के एक अधिवक्ता ने कहा कि केयर्न कई देशों में मुकदमा दायर करेगी, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को भारत सरकार पर बकाया 1.2 अरब डॉलर के साथ ब्याज और जुर्माने के भुगतान के लिए ‘जिम्मेदार’ बनाया जा सके।

बता दें कि पिछले महीने केयर्न ने न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले के लिए अमेरिकी जिला अदालत में मुकदमा दायर किया था। चार साल के दौरान पंचनिर्णय प्रक्रिया में शामिल रहने के बावजूद भारत सरकार ने इस फैसले को स्वीकार नहीं किया था और न्यायाधिकरण की सीट- नीदरलैंड की अदालत में इसे चुनौती दी थी।
केयर्न ने कहा था कि एयर इंडिया पर भारत सरकार का नियंत्रण है। ऐसे में एयरलाइन पर पंचनिर्णय के तहत भुगतान का दायित्व बनता है। क्विन इमैनुअल उर्कहार्ट एंड सुलिवन के सॉवरेन लिटिगेशन प्रैक्टिस प्रमुख डेनिस हर्निटजकी के अनुसार, कई ऐसे सार्वजनिक उपक्रम हैं, जिनपर हम प्रवर्तक कार्रवाई का विचार रहे हैं। प्रवर्तन कार्रवाई जल्द होगी और शायद यह अमेरिका में नहीं हो।


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