ट्रंप ने सैन्य विकल्प खुला रखा; परमाणु दावे से दुनिया में खलबली
तेहरान ने कहा- अमेरिका से संपर्क जारी; ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई पर फैसला टाला
युद्ध पर वाशिंगटन अब तक 47 अरब डॉलर से अधिक खर्च कर चुका है
✍️ विशेष अंतरराष्ट्रीय डेस्क, वाशिंगटन/तेहरान | मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच सीधा सैन्य टकराव भड़कने की आशंका एक बार फिर गहरा गई है। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले कतर की मध्यस्थता में दोहा में हुई बैक-चैनल कूटनीतिक वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई है। हालांकि कूटनीतिक गतिरोध के बावजूद तेहरान और वाशिंगटन ने अप्रत्यक्ष संपर्क जारी रहने की पुष्टि की है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रखे जाने से खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
इसी बीच, अमेरिकी राजनीतिक टिप्पणीकार टकर कार्लसन के एक सोशल मीडिया दावे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी फैला दी है। कार्लसन का दावा है कि इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ईरान के मध्य क्षेत्र में स्थित भूमिगत ‘पिकैक्स माउंटेन’ परमाणु परिसर को निशाना बनाने के लिए वॉशिंगटन पर दबाव बना रहे हैं और इसके लिए सामरिक परमाणु हथियारों तक के इस्तेमाल पर विचार किया जा रहा है।
हालांकि, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) और इज़रायल ने इस दावे को पूरी तरह खारिज किया है और इसकी कोई स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि प्रशासन फिलहाल कूटनीतिक समाधान को ही प्राथमिकता दे रहा है और किसी भी नए सैन्य हमले का अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
दूसरी ओर, तेहरान ने किसी भी नए सैन्य दुस्साहस के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि बातचीत तभी आगे बढ़ सकती है जब अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त हो, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य हो और तेल प्रतिबंधों में छूट दी जाए। साथ ही, ईरान ने अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को देश से बाहर भेजने की अमेरिकी शर्त को सिरे से ठुकरा दिया है। ईरान के नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि किसी भी हमले का दायरा केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर पूरे क्षेत्र के समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा।
सैन्य विकल्पों की भारी आर्थिक कीमत भी वाशिंगटन के लिए बड़ा सिरदर्द बनी हुई है। पेंटागन के अनुमानों के हवाले से मध्य-पूर्व में जारी अमेरिकी सैन्य अभियानों, नौसैनिक तैनाती और हथियारों की भरपाई पर अब तक 47 अरब डॉलर से अधिक का बोझ पड़ चुका है। घरेलू स्तर पर तेल की बढ़ती कीमतों और मध्यावधि चुनावों के राजनीतिक दबाव के बीच व्हाइट हाउस के लिए कूटनीति और सैन्य टकराव के बीच संतुलन साधना बेहद चुनौतीपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है।
