✍️ प्रहरी संवाददाता, मुंबई | हाथ में नकदी की तंगी और बाजार में इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों की बेतहाशा बढ़ती कीमतों ने इस त्योहारी सीजन में आम भारतीय उपभोक्ता को ‘उधार की खुशियों’ के हवाले कर दिया है। ई-कॉमर्स मंचों और खुदरा दुकानों पर त्योहारों के दौरान हुए करीब 1.55 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड कारोबार का सच यह है कि इसका 45 फीसदी से अधिक हिस्सा ‘नो-कॉस्ट ईएमआई’ और कंज्यूमर फाइनेंसिंग के दम पर खड़ा हुआ। वर्ष 2021 के मुकाबले 2026 में लैपटॉप, स्मार्टफोन, टीवी और घरेलू उपकरणों की कीमतें डेढ़ से पौने दो गुना तक बढ़ जाने के कारण ग्राहकों की एकमुश्त जेब खाली हो गई, जिसका सीधा फायदा उठाकर बैंकों, फिनटेक और नॉन-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने अकेले इस त्योहारी सीजन में सवा लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का गैर-सुरक्षित कर्ज बांट दिया।

उद्योग ट्रैकर रेडसीर और डेटम इंटेलिजेंस के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय ई-कॉमर्स का त्योहारी कारोबार वर्ष 2021 के 68,000 करोड़ रुपये से ढाई गुना से अधिक छलांग लगाकर वर्ष 2026 में 1.55 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर जा पहुंचा है। इस पूरे बाजार की रीढ़ बना कंज्यूमर क्रेडिट, जहां 20,000 रुपये से अधिक मूल्य वाले 65 फीसदी से ज्यादा स्मार्टफोन और लैपटॉप सीधे किस्तों पर उठाए गए। मध्यवर्ग को लुभाने के लिए बाजार में उतारी गई ‘नो-कॉस्ट ईएमआई’ की हकीकत यह रही कि उत्पाद पर मिलने वाली सीधी छूट छीनकर और प्रोसेसिंग व जीएसटी के परदे के पीछे लागत जोड़कर कंपनियों ने उपभोक्ताओं को कर्जदार बना दिया।
रिजर्व बैंक और केयर रेटिंग्स के वित्तीय आंकड़े गवाह हैं कि इस उपभोक्ता मजबूरी का सबसे बड़ा मुनाफा एनबीएफसी की झोली में गया। वित्तीय वर्ष 2021-22 में जहां वाणिज्यिक बैंकों का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स लोन आउटस्टैंडिंग 25,100 करोड़ रुपये के आसपास सिमटा था, वहीं 2026 के ताजा दौर में एनबीएफसी का खुदरा ऋण 22 फीसदी की सालाना दर से बढ़कर 26.5 लाख करोड़ रुपये पार कर चुका है। इसमें कंज्यूमर ड्यूरेबल्स फाइनेंसिंग में 56.4 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज हुई है, जो पिछले वर्ष समान अवधि के 19.6 प्रतिशत की तुलना में करीब तीन गुना तेज विस्तार है। बैंक और एनबीएफसी मिलाकर सिर्फ इस त्योहारी अवधि में 1.15 से 1.25 लाख करोड़ रुपये का पर्सनल व ड्यूरेबल्स कर्ज खपाने में सफल रहे।
कर्ज के इस अंधाधुंध विस्तार की असली जड़ें बीते पांच वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों में लगी आग में छिपी हैं। इंटरनेशनल डेटा कॉरपोरेशन (आईडीसी) और काउंटरपॉइंट रिसर्च के प्रामाणिक आंकड़े बताते हैं कि 2021 से 2026 के बीच वर्क लैपटॉप, डेस्कटॉप और स्मार्टफोन्स की औसत बिक्री कीमत में 40 से 90 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। वर्ष 2021 में जो मुख्यधारा का सामान्य लैपटॉप 38,000 से 45,000 रुपये में उपलब्ध था, वही आज उन्नत चिपसेट, एआई न्यूरल प्रोसेसिंग यूनिट्स और महंगे डीरैम के चलते 60,000 से 72,000 रुपये के पार बिक रहा है। ठीक यही हाल स्मार्टफोन बाजार का रहा, जहां औसत बिक्री मूल्य 15,000 रुपये से उछलकर 25,000 रुपये के दायरे में पहुंच गया।
दूसरी ओर ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (बीईई) के कड़े नियमों, तांबे की अंतरराष्ट्रीय कीमतों और लॉजिस्टिक्स लागत के नाम पर एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर 1.5 गुना तक महंगे कर दिए गए। नतीजतन, त्योहार के मौके पर परिवार की तकनीकी जरूरतें पूरी करने के लिए आम खरीदार के पास वित्तीय कंपनियों के मासिक किस्तों के चक्रव्यूह में फंसने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा।
