प्रहरी संवाददाता, मुंबई। ग्लोबल संकट की वजह से भारत ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों के शेयर बाजारों में भारी उथल-पुथल मची हुई है। रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका, इंग्लैंड और अन्य विकसित देशों में महंगाई दर के ऊपरी स्तर पर पहुंचने और क्रूड ऑइल की तेजी ने बाजार में गिरावट का दौर शुरू कर दिया है। इसके अलावा, डॉलर में मजबूती से भी भारतीय बाजारों पर दबाव देखा जा रहा है। पिछले एक महीने में निगेटिव क्लोजिंग के कारण बीएसई के मार्केट कैपिटलाइजेशन 34.27 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई है।
बता दें कि भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार पांचवे कारोबारी सत्र में गिरावट आई। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,158.08 अंक (2.14 प्रतिशत) फिसलकर 52,930.31 अंक और निफ्टी 359.10 अंक (2.22 प्रतिशत) लुढ़कर15,808 अंक पर बंद हुआ। विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक स्तर पर नकरात्मक रुख के बीच सेंसेक्स और निफ्टी में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।
मई महीने में अब तक बीएसई का सेंसेक्स 4 हजार अंक फिसल चुका है, जबकि एनएसई का निफ्टी-50 इंडेक्स भी 1261 अंक लुढ़का है। एनएसई अपने 18,604.45 अंक के उच्च स्तर से अब तक 2796.45 अंक नीचे चला आया है। हालांकि बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यह करेक्शन आगे भी जारी रहेगा। निवेशकों को इससे घबराने की जरूरत नहीं है। निवेशकों को सतर्क रहकर निवेश करना होगा।
बता दें कि 11 अप्रैल 2022 से 12 मई 2022 के दौरान शेयर बाजार के पूंजीकरण में 34,26,981.47 यानी 34.27 लाख करोड़ रुपये की कमी आ चुकी है। 11 अप्रैल को शेयर बाजार की हैसियत 2.75 लाख करोड़ रुपये के नए लेवल पर पहुंच गई थी, जबकि उसके बाद लगातार जारी बिकवाली के दबाव में यानी 12 मई तक के कारोबार के दौरान बाजार हैसियत घटकर 2.41 लाख करोड़ रुपये हो गई है।
