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राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग का खौफ, महाराष्ट्र की सातों सीटें निर्विरोध

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  • 26 सीटों के नतीजे पहले ही निर्विरोध घोषित

  • विपक्ष के विधायकों की गैरहाजिरी ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचाई

✍🏻 प्रहरी संवाददाता, मुंबई| राज्यसभा की खाली हुई 37 सीटों के लिए हुई चुनाव प्रक्रिया में कई राज्यों में क्रॉस वोटिंग की आशंका और विधायकों की गैरहाजिरी ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। इन चुनावों में 26 सीटों के नतीजे पहले ही निर्विरोध तय हो चुके थे, जबकि बिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों के लिए सोमवार को मतदान कराया गया। नतीजों में भारतीय जनता पार्टी और उसके नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने बढ़त बनाई, जिससे विपक्षी कांग्रेस, आरजेडी और बीजेडी के खेमे में चिंता बढ़ गई।

क्रॉस वोटिंग की आशंका और संभावित राजनीतिक टूट-फूट के बीच महाराष्ट्र की सातों सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के छह उम्मीदवार बिना मुकाबले राज्यसभा पहुंच गए, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार भी निर्विरोध निर्वाचित हुए।

महाराष्ट्र से भारतीय जनता पार्टी के विनोद तावड़े, रामराव बाड़कुटे और माया इवानेते राज्यसभा के लिए चुने गए। इसके अलावा रिपब्लिकन पार्टी के रामदास आठवले, शिवसेना की ज्योति वाघमारे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के पार्थ पवार भी निर्विरोध निर्वाचित हुए। विधानसभा में संख्या बल और क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए विपक्षी दलों ने कई सीटों पर उम्मीदवार नहीं उतारे।

तमिलनाडु में भी राज्यसभा की छह सीटों पर सभी उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। इनमें द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के तिरुचि शिवा और जे रविंद्रन, कांग्रेस के एम तिलक, देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कड़गम के एलके सुदीश, अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के एम थंबीदुबई और पट्टाली मक्कल कच्ची के अंबुमनी रामदौस शामिल हैं।

बिहार की पांच सीटों के लिए हुए चुनाव में एनडीए ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की। एनडीए की ओर से नितिन नवीन, नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा, रामनाथ ठाकुर और शिवेश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए। मतदान के दौरान विपक्षी महागठबंधन को अपने ही विधायकों की अनुपस्थिति से झटका लगा। कांग्रेस के तीन और राष्ट्रीय जनता दल के एक विधायक वोटिंग के समय मौजूद नहीं थे। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 41 वोट जरूरी थे, जबकि विपक्ष के पास शुरुआत में 35 विधायक थे। चार विधायकों की गैरहाजिरी से विपक्ष का गणित बिगड़ गया। हालांकि एआईएमआईएम के पांच और बसपा के एक विधायक ने विपक्षी उम्मीदवार का समर्थन किया, लेकिन संख्या पूरी नहीं हो सकी।

हरियाणा में दो सीटों के लिए हुए चुनाव में भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के करमवीर सिंह बौद्ध राज्यसभा के लिए चुने गए। मतदान के बाद मतगणना करीब पांच घंटे देर से शुरू हुई। भाजपा और कांग्रेस ने एक-दूसरे के विधायकों पर वोट की गोपनीयता तोड़ने के आरोप लगाए। चुनाव अधिकारियों के अनुसार पांच वोट अमान्य घोषित किए गए, जिनमें चार कांग्रेस और एक भाजपा विधायक का वोट शामिल था।

ओडिशा में चार सीटों के चुनाव में क्रॉस वोटिंग की चर्चा सबसे ज्यादा रही। भाजपा के राज्य अध्यक्ष मनमोहन सामल और सुजीत कुमार जीत गए, जबकि बीजू जनता दल के संतृप्त मिश्रा को एक सीट मिली। चौथी सीट भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे के खाते में गई। विधानसभा में भाजपा और उसके सहयोगियों की संख्या 82 होने के बावजूद भाजपा उम्मीदवारों को 93 प्रथम वरीयता वोट मिले, जिससे विपक्षी दलों के विधायकों के पार्टी लाइन से हटकर मतदान करने की चर्चा तेज हो गई।

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